फोरेंसिक विशेषज्ञों की जांच में बदायूं मामले में किशोरियों के साथ दुराचार के साक्ष्य न पाए जाने पर अब एक बार फिर बदायूं कांड सुर्खियों में आ गया है।
सीबीआई ने भी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए दुराचार की पुष्टि न होने की बात कही है। अब ऐसे में सीबीआई को हत्या के कारणों की एक बार नए सिरे से जांच करनी होगी।
सीबीआई के सामने अब इस मामले में लगभग तीन माह पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी भाई पप्पू, अवधेश व उर्वेश यादव व दो सिपाहियों छत्रपाल और सर्वेश यादव के खिलाफ आरोप पत्र लगाना मुश्किल हो गया है।
हत्या का कारण अब भी पता नहीं
अभी तक की जांच में गिरफ्तार लोगों को सामूहिक दुराचार के बाद हत्या का आरोपी बताया गया था। इन्हीं धाराओं में उनकी गिरफ्तारी कर उन्हें जेल भी भेजा गया था।
इसके साथ ही बदायूं पुलिस की प्रारंभिक जांच के दौरान ऑनर किलिंग की थ्योरी को भी बल मिल रहा है। गौरतलब है कि सूबे की पुलिस के मुखिया भी इस बात की संभावना जता चुके हैं कि हत्या का कारण कुछ और रहा हो।
पूर्व में जब सीबीआई ने आरोपियों का पॉलीग्राफी परीक्षण कराया था तो उन्होंने आरोपों से इन्कार किया था और उनके परीक्षण में उनके द्वारा दिए गए जवाबों में किसी तरह का विरोधाभास नहीं पाया गया था। जबकि पीड़ित परिवार के सदस्यों के ऐसे ही परीक्षण में कुछ विरोधाभास पाया गया था।
अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी
सीबीआई को अदालत में जल्दी ही इस मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट भी दाखिल करनी है। अदालत में इस मामले की सुनवाई 25 अगस्त को होनी है।
इससे पहले सीबीआई को गिरफ्तार हो चुके आरोपियों के बारे में भी अब नए सिरे से रिपोर्ट देनी होगी। इस बात की संभावना भी है, कि सीबीआई एक बार फिर दोनों पक्षों से नए सिरे से पूछताछ करे।
सीबीआई के सामने अब सबसे अहम सवाल यह है कि हत्या का कारण क्या था। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि इस बात को लेकर कयास तो सामने आ चुके हैं पर पूर्व में हुए खुलासे की वजह से अभी इन्हें लेकर कोई ठोस पड़ताल नहीं हुई है।