नेपाल से रोजाना दो से तीन एंबुलेंस राजधानी के सरकारी संस्थानों में भर्ती कराने के लिए मरीज लेकर निकलती हैं। हालांकि, इनमें से एक भी यहां भर्ती नहीं हो पाता है। सभी मरीज इन पांच निजी अस्पतालों के जाल में फंसा लिए जाते हैं। यहां इलाज के नाम पर इनसे मोटी कमाई की जाती है। बिल न चुकाने पर परिजनों को नेपाल वापस भेजकर रकम लेकर आने के बाद ही मरीज को छोड़ा जाता है।
एक नेपाली मरीज पर 50 हजार तक का कमीशन
राजधानी का कोई मरीज इन अस्पतालों में लाने पर एंबुलेंसवालों को 20 हजार रुपये मिलते हैं। वहीं, नेपाली मरीज लाने पर 50 हजार रुपये या मरीज के इलाज में खर्च रकम का 30 प्रतिशत संगठित गिरोह को मिलता है। यह रकम एंबुलेंस चालक के अलावा गिरोह के लोगों में बंटती है।
पुलिस की मदद से कसेंगे नकेल
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। इस पर नकेल कसने के लिए पुलिस की भी मदद ली जाएगी।