दरअसल चारबाग रेलवे स्टेशन का अपग्रेडेशन जिस मॉडल पर होना था। उसके अंतर्गत रेलवे की जमीनों का व्यवसायिक इस्तेमाल कर होने वाली आमदनी से स्टेशन का निर्माण कार्य करवाया जाना था लेकिन नोटबंदी और फिर कोरोना संक्रमण की वजह से रेलवे की जमीनों का कमर्शियल इस्तेमाल का प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया जबकि उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से चार रेलवे कॉलोनी खाली करवा कर आरएलडीए को काफी पहले ही सौंपी जा चुकी हैं।
इस प्रोजेक्ट को 2021 तक पूरा करना था, लेकिन अब एनईसीसी के पीछे हट जाने से यह प्रोजेक्ट अपने समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। चारबाग स्टेशन अपग्रेडेशन के अंतर्गत बेसमेंट पार्किंग, सेकंड एंट्री का डेवलपमेंट, लिफ्ट स्क्लेटर और तमाम यात्री सुविधाओं के कार्य होने थे।
यात्री सुविधाओं का लिया जायजा
जीएम आशुतोष गंगल ने मंगलवार को चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। डीआरएम संजय त्रिपाठी और सीनियर डीसीएम जगतोष शुक्ल के साथ उन्होंने स्टेशन पर बने नए फुटओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, प्लेटफार्म नंबर 6 व 7 के वॉशेबल एप्रन, आलमबाग की ओर बनी सेकंड एंट्री, सर्कुलेटिंग एरिया, डॉरमेट्री, बुकिंग काउंटर आदि का निरीक्षण किया।
उन्होंने यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश दिए और यात्रियों से अपील की कि मास्क, सैनिटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ज़रूर करें। इसके अतिरिक्त प्रदेश के मुख्य सचिव व मंडल के आला अधिकारियों के साथ भी बैठक की।
चारबाग रेलवे स्टेशन पर इलेक्ट्रिक इंजनों की ट्रिपिंग की मेंटिनेंस के लिए सेकंड एंट्री के पास बने नए शेड का उद्घाटन जीएम ने किया। सीनियर डीसीएम जगतोष शुक्ल ने बताया कि इससे चारबाग पहुंचने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों की ट्रिपिंग की मेंटिनेंस आसान हो जाएगा। दरअसल एक नियत समय तक इलेक्ट्रिक इंजन के चलने के बाद उसकी ट्रिपिंग की मेंटिनेंस होती है, ऐसे में यह ट्रिप शेड राहत देगा।
जल्द चारबाग के आउटर बनेंगे फोरलेन
चारबाग रेलवे स्टेशन पर आने वाली गाड़ियों को आउटर पर नहीं खड़ा करना पड़ेगा। जिया में बताया कि चारबाग स्टेशन से दिलकुशा केबिन और आलमनगर केबिन तक फोरलेन बनाया जाएगा जबकि अभी सिर्फ टू लेन ही है। इससे गाड़ियों को आसानी से चारबाग स्टेशन तक लाया जा सकेगा और यात्रियों के समय की भी बचत होगी।