राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण के मसले पर दिए गए अपने बयान से पलटी मारी है। गोरखपुर के एक कार्यक्रम में आए भागवत ने कहा कि उन्होंने कभी आरक्षण का विरोध नहीं किया।
उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया और उनकी बातों के गलत अर्थ निकाले गए। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ पात्रों को आरक्षण देने के पैरोकार हैं। चाहे वह किसी जाति का हो।
आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए और जातिगत आधार की जगह पिछड़े और संसाधनहीन लोगों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए। गोरखपुर में पांच दिन के प्रवास के आखिरी दिन मंगलवार को भागवत ने कुछ समय शहर के प्रमुख लोगों के बीच गुजारा।
सिविल लाइंस स्थित गोकुल भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संघ, मुस्लिमों को हिंदुओं से अलग नहीं मानता क्योंकि वे भी हिंदू हैं। भारत में ज्यादातर मुसलमानों के पूर्वज हिंदू ही थे।
पूरी दुनिया इसे मानती है। ऐसा न होता तो हज करने वाले लोगों को मक्का में जुटने वाले दुनिया भर के मुसलमान हिंदू हाजी कहकर न पुकारते। उन्होंने कहा कि इतिहास उठाकर देखें तो पता चल जाएगा कि गिनती के ही मुसलमान बाहर से आकर भारत में बसे। यहां के ज्यादातर हिंदू ही धर्मपरिवर्तन से मुसलमान बने हैं।
कार्यक्रम में आए लोगों की समस्याओं को सुनने और उनसे ज्ञापन लेने के बाद भागवत ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई यह कतई न समझे कि वह उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहेंगे या सिफारिश करेंगे। इन सभी समस्याओं पर संघ खुद विचार करेगा और इनके निस्तारण के लिए जरूरी कोशिशें भी।