केंद्र सरकार की ओर से तीन तलाक को औरतों के अधिकारों के खिलाफ बताने और समान नागरिक संहिता के खिलाफ शुक्रवार को शुरू हुए हस्ताक्षर अभियान में शामिल होकर मुसलमानों ने संदेश दिया कि इस्लामी शरीयत में किसी भी तरह का बदलाव उन्हें मंजूर नहीं है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर ऐशबाग ईदगाह स्थित दारुल उलूम फरंगी महल में जुमे की नमाज के बाद हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।
इसमें सैकड़ों मुसलमानों ने फॉर्म पर हस्ताक्षर कर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया में जमा किया। अभियान में बड़ी तादाद में मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं।
इससे पहले जुमे की नमाज के दौरान ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर तीन तलाक को महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है, यह इस्लामी शरीयत में खुला हस्तक्षेप है। अब लॉ कमीशन ने भी इस मामले में लोगों से राय मांगी है।
लोकतांत्रित तरीके से दिया जाएगा जवाब
- फोटो : amar ujala
मौलाना ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों को छीनने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। वहीं, नादान महल रोड स्थित मस्जिद तक्वीअतुल ईमान में ऑल इंडिया सुन्नी बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद मुश्ताक की अगुवाई में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।
30 अक्टूबर तक जमा करें फॉर्म
मौलाना फरंगी महली ने कहा कि शहर की सभी मस्जिदों में हस्ताक्षर फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं।
ज्यादा से ज्यादा लोग फॉर्म पर अपना नाम, पता भरने के साथ हस्ताक्षर कर 30 अक्तूबर तक इसे इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के कार्यालय में जमा कराएं। ये फॉर्म सरकार को भेजकर बताया जाएगा कि हमें शरीयत में दखलअंदाजी कुबूल नहीं है।
ये हैं फॉर्म के तीन बिंदु
1. हम इस्लामी शरीयत के तमाम आदेशों, विशेषकर निकाह, तलाक, खुला, फस्ख, विरासत के दीनी आदेश से पूरी तरह सहमत हैं और उनमें किसी बदलाव की जरूरत या गुंजाइश से इन्कार करते हैं।
2. भारत में हर धर्म के मानने वाले को अपने धर्म पर अमल करने की पूरी आजादी भारतीय संविधान ने दी है, इसलिए हमें किसी भी सूरत में समान नागरिक संहिता कुबूल नहीं है।
3. हम शरीयत के कानून की सुरक्षा में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं।