आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य के बयान की मुस्लिम विद्वानों और धर्मगुरुओं ने भी कड़ी मजम्मत की है। उन्होंने कहा कि मुल्क किसी संगठन की राय से नहीं, संविधान से चलता है।
देश में कोई अल्पसंख्यक न होने जैसी बात करके संघ के नेता दुनिया में हिंदुस्तान की छवि धूमिल कर रहे हैं। इस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलमा ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौ. डॉ. कल्बे सादिक का कहना है कि आरएसएस धर्म का ठेकेदार नहीं है। मनमोहन वैद्य की बात का जवाब में कुछ दिनों बाद देना चाहूंगा।
वहीं वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना आगा रूही का कहना है कि संघ की बातों को हम इतनी संजीदगी से नहीं लेते हैं। उनका कहना है कि हिंदुस्तान में सभी अलग-अलग भाषा बोलता है।
मुस्लमानों में दहशत पैदा करना चाहता है संघ
ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद कहते हैं कि वैद्य के इस बयान से गंगा-जमुनी तहजीब पर सवालिया निशान लग गया है। इस तरह के बयान की धर्म निरपेक्ष हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुल्क इस तरह के संघ की विचारधारा से नहीं चलता। अल्पसंख्यकों को इस देश में अधिकार मिले हुए हैं।
आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर कहती हैं कि आरएसएस धर्म के नाम पर मुसलमानों में दहशत पैदा करना चाहता है। हमारे देश के संविधान ने सभी मजहब के लोगों को अपनी-अपनी धार्मिक आजादी से जीने का अधिकार दिया है।
ऐसे में देश के लोग किसी तरह की जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं करेंगे। तालिबानी कट्टरपंथी देशों की तरह बयान जारी कर आरएसएस देश की संस्कृति व तहजीब को भूल चुका है। ऐसे बयानों का सख्त विरोध होना चाहिए।
संघ से हमें रहना होगा होशियार
मनमोहन वैघ ने कहा कि देश में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है और यहां कोई अल्पसंख्यक नहीं है। इस बयान पर शिया धर्मगुरू मौलाना हमीदुल हसन ने अपना रोष प्रकट किया।
हमीदुल हसन कहते हैं कि कई साल पहले केसी सुदर्शन साहब मुझसे मुलाकात करने आए थे। उन्होंने मुझसे पूछा था कि आपको हिंदू कहलाने में क्या एतराज है?
मैने जवाब दिया कि जिस तरह चीन में रहने वाला चीनी, ईरान में रहने वाले ईरानी और जापान में रहने वाले जापानी कहलाते हैं।
उसी तरह से हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदी कहलाते हैं, इसमें कोई एतराज नहीं है। शिया धर्मगुरू का कहना है कि अब इस तरह के बयान देकर लोग अपने ही बुजुगोऱ्ं का अपमान कर रहे हैं।
इनका मकसद अल्पसंख्यक लोगों को भड़काना है जिससे हमें होशियार रहने की जरूरत है।