राजधानी पुलिस के लापरवाह रवैये से एक और बेटी को दरिंदों ने रेप के बाद मार डाला। माता-पिता गुमशुदगी दर्ज कराकर दस दिन तक बेटी को खोजने की गुहार लगाते रहे, लेकिन आशियाना पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। 11वीं की छात्रा का शव शुक्रवार को मिला था।
शनिवार को पोस्टमार्टम में दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की पुष्टि होते ही लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। शव रखकर प्रदर्शन करने के साथ ही पथराव और आगजनी की।
इंस्पेक्टर व दरोगाओं से तीखी झड़प के साथ हाथापाई हुई। हालात काबू में करने के लिए कई थानों की पुलिस व पीएसी बुलानी पड़ी।
पुलिस के मुताबिक, आशियाना क्षेत्र के एक स्कूल में 11वीं की छात्रा 20 दिसंबर को छुट्टी होने पर सहेलियों के साथ निकली। इसके बाद लापता हो गई। अगले दिन गुमशुदगी दर्ज करके सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। इसमें छात्रा तीनों लोगों के साथ बातचीत करते हुए जाते नजर आई।
दुष्कर्म के बाद की गई हत्या
हंगामा करते लोग
- फोटो : amar ujala
उसकी तलाश चल रही थी कि शुक्रवार को नगराम इलाके में शारदा नहर के अचली खेड़ा रेगुलेटर में स्कूल ड्रेस पहने छात्रा का शव मिला। इंस्पेक्टर आशियाना ने लापता छात्रा के परिवारीजनों को पुलिस टीम के साथ मॉर्च्युरी भेजा। स्कूल ड्रेस में शव देखते ही बिलख पड़े।
छात्रा के शव की शिनाख्त के बाद डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। इसमें दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। इसका पता चलते ही परिवारीजन आक्रोशित हो गए। देरशाम आशियाना इलाके में शव रखकर प्रदर्शन शुरू किया।
आक्रोशित भीड़ ने मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। नोकझोंक के साथ हाथापाई की। पुलिस पीछे हटते देख पथराव करने लगे। भीड़ ने सड़क पर लकड़ी-पुआल रखकर आग लगाई।
पुलिस संजीदगी दिखाती तो बच सकती थी जान
लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे पिता व परिवारीजनों ने कहा कि पुलिस संजीदगी दिखाकर कार्रवाई करती तो छात्रा की जान बच सकती थी। छात्रा दस दस दिन से लापता थी और उसकी हत्या सात दिन पहले हुई थी।
इससे स्पष्ट है कि उसे अज्ञात स्थान पर बंधक बनाकर तीन दिन सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला दबाकर मारा गया। नशा देने व पिटाई की भी आशंका जताई है।
पिता ने कहा कि उन्होंने 20 दिसंबर की शाम मोहल्ले के फराज व शुएब पर अपहरण का शक जताते हुए आशियाना थाने में तहरीर दी थी लेकिन पुलिसकर्मियों ने लौटा दिया। अगले दिन तहरीर बदलवाकर गुमशुदगी दर्ज की लेकिन छात्रा की तलाश के ठोस प्रयास नहीं किए।
आरोप है कि अपहरण की सूचना को संजीदगी से लेकर कार्रवाई की जाती तो छात्रा की जान बच सकती थी। पुलिस ने शुएब व फराज से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया था।