हिंदुस्तान की तहजीब का एक हिस्सा गिरा है आज : जावेद अख्तर
जावेद अख्तर ने कहा कि हकीकत है कि आज शायरी का, उर्दू का और हिंदुस्तान की तहजीब का नुकसान हुआ है। हिंदुस्तान की तहजीब का यह एक अहम हिस्सा था, जो गिर गया। एक नस्ल धीरे-धीरे जा रही है। निदा फाजली, राहत साहब और अब मुनव्वर साहब का जाना। इसकी भरपाई तो नहीं हो पाएगी। पर हकीकत है जो आता है वो जाता है। उनके परिवार को हिम्मत मिले। उन्हें हमेशा शायरी के लिए ही जानेंगे लोग। मां को उन्होंने पहली बार शायरी का हिस्सा बनाया। उनका शेर कहने का अपना रंग था।
लिखकर जगाने का काम किया : अखिलेश यादव
प्रदेश के बड़े शायर थे, उन्होंने लिखकर लोगों को जगाने का काम किया। मैंने खुद देखा है कि उनकी मां पर लिखी लाइनों को सुनने के लिए लोग निवेदन करते थे। ऐसे शायर कम आते हैं, जो मन में है उसे बिना छिपाए कह जाते थे। कहा कि आजम खां साहब उन्हें लेकर पहली बार सैफई आए, फिर अक्सर मुलाकात होती थी। भगवान उनके परिवार को दुख सहने को शक्ति दे। मुनव्वर राना की शायरी को याद करते हुए कहा- तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है, फिर आंखें खोल ली जाएं कि सपना खत्म होता है।
अपनी शायरी के लिए याद रखे जाएंगे : इब्राहिम अल्वी
उर्दू पत्रकारिता से जुड़े पूर्व संपादक अहमद इब्राहिम अल्वी ने मुनव्वर राना को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जिंदगी के हर पहलू पर शायरी की थी। महबूबा की गोद से लेकर मां के आंचल तक मुनव्वर राना के हर शेर याद रखे जाएंगे।