सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में हुए बाबरी विध्वंस पर सालों बाद अफसोस जताया। रविवार को एक कार्यक्रम में मुलायम ने कहा, 1991 में अयोध्या में गोली चलने के कारण मैंने नैतिकता के नाते मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
मस्जिद बचाने के लिए गोली चलानी पड़ी। अफसोस है कि इसमें 21 लोगों की जान गई। संसद में नेता विरोधी दल अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि हमने 21 लोगों को मरवा दिया। हमने कहा कि 21 के बजाय 30 लोगों की जान जाती तो भी धर्मस्थल बचाते।
कर्पूरी ठाकुर से सीखें नौजवान : मुलायम
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कहा कि युवाओं को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से सीखना चाहिए कि बाधाएं कितनी भी आएं, वे बड़े नेता बन सकते हैं। वे कर्पूरी ठाकुर की 92वीं जयंती पर रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, कर्पूरी ठाकुर के बारे में नौजवान जान जाएं तो कितनी भी बाधाएं क्यों न हों, वे बड़े नेता बन सकते हैं। उनमें बहुत सादगी थी। वे गांव में सबसे गरीब आदमी के घर खाना खाते थे, उसी के यहां रुकते थे।
सर्दियों में वे एक कुर्ते के ऊपर दूसरा कुर्ता पहन लेते थे। डॉ. लोहिया चाहते थे कि कर्पूरी ठाकुर बिहार से और रामसेवक यादव यूपी से बाहर निकलें। दूसरे राज्यों में जाएं। जबलपुर अधिवेशन में कर्पूरी ठाकुर को सोशलिस्ट पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। यदि आपमें इच्छा शक्ति, संकल्प शक्ति और साहस हो तो गरीब और कमजोर होने के बावजूद कोई आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता।
उन्होंने कहा, मझसे बूढ़ा यादव कौन?
मुलायम ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने कर्पूरी ठाकुर को लोकसभा का टिकट दिया और वे सांसद चुने गए। स्थिति ऐसी आई कि उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया गया। लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ना था।
कांग्रेस ने उनके खिलाफ एक प्रभावशाली और ईमानदार छवि के यादव को प्रत्याशी बनाया। यादव वोट कांग्रेस की तरफ जाने लगा। जानकारी मिलने पर चौधरी चरण सिंह की सभा कराई गई। चौधरी साहब ने कहा, मुझे पता लगा है कि यहां लोग जात-पांत पर वोट दे रहे हैं।
मुझसे बूढ़ा यादव कौन है? उनका इतना कहना था कि चुनाव इकतरफा हो गया और कर्पूरी ठाकुर 65 हजार वोटों से चुनाव जीते।