इसे सपा सुप्रीमो की जुबानी फिसलन कहें या फिर जान-बूझकर हंसी-हंसी में धमकी देने का अंदाज।
असल में गाजियाबाद जिले के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज में सपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह भाटी के समर्थन में जनसभा के दौरान मुलायम सिंह यादव ने शिक्षामित्रों को धमका दिया।
उन्होंने कहा कि अगर शिक्षामित्र उन्हें वोट नहीं देंगे, तो वह उनकी स्थायी शिक्षक बनने की प्रक्रिया पर रोक लगा देंगे।
मुलायम के इस बयान से यह साफ झलक रहा है कि दिल्ली की कुर्सी पाने के लिए उन्होंने आचार संहिता तक का ख्याल नहीं।
विरोधी दलों का क्या है कहना
मुलायम का यह वीडियो ज्यों ही मीडिया में आया, सभी राजनीतिक पार्टियों में हड़कंप मच गया।
ज्यादातर पार्टियों ने इसकी भर्त्सना की है और मुलायम सिंह पर कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार देर रात तक प्रशासन ने इस प्रकरण पर कोई बयान जारी नहीं किया था।
शुक्रवार दोपहर तक भी चुनाव आयोग की इस घटना पर कार्रवाई किए जाने की कोई खबर नहीं मिली।
नमो पर किया जुबानी वार
इस दौरान सपा सुप्रीमो ने भारतीय जनता पार्टी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि वह जितना चाहें, प्रचार करा लें, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना नहीं है।
सपा सबसे सशक्त पार्टी बनकर उभरेगी। मुलायम ने तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की बात भी दोहराई।
वोट के लिए की गई थी घोषणा
यूपी सरकार ने वोट के उद्देश्य से ही चुनाव के ठीक पहले शिक्षामित्रों को अध्यापक बनाने की घोषणा की थी।
अखिलेश यादव की अध्यक्षता में 1 लाख 70 हजार शिक्षा मित्रों के लिए बड़ा फैसला लिया गया था।
प्रदेश सरकार ने इन सभी शिक्षा मित्रों के समायोजन के लिए नई नियमावली भी बनाने का आदेश दिया था।
ऐसे में मुलायम सिंह यादव का यह बयान सपा के लिए सिरदर्द न बन जाए।