लगता है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव आम चुनाव में हार के सदमें से अभी भी निकल नहीं पाए हैं, समीक्षा बैठक में हार उन्होंने धमकी तक दे डाली।
मुलायम ने समीक्षा बैठक में जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों का मनोबल बढ़ाया। उनसे जनता के बीच जाने और जिला स्तर पर सम्मेलन करने की सलाह दी साथ ही उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
मुलायम ने कहा, राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। हमने इसके कई दौर देखे हैं। इसलिए, हार-जीत की ज्यादा चिंता न करें। कार्यकर्ता और नेता जनता का काम करें। जनता जनार्दन ही नेता बनाती है। उसी के बीच जाएं। जिलों में सम्मेलन कर अपनी बात बताएं।
उन्होंने कहा, सपा में सबसे ज्यादा निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। उन्होंने जिलाध्यक्षों से संगठन को और मजबूत बनाने तथा मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों का मुकाबला करने का आह्वान किया। कहा कि सपा सस्ती लोकप्रियता की नहीं, सिद्धांत की राजनीति करती है।
मंत्रियों, विधायकों ने हराया चुनाव
सपा में लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा का दौर जारी है। बुधवार को संगठन के साथ पार्टी मुख्यालय में समीक्षा बैठक में जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों ने चुनाव में हार का ठीकरा अफसरों, मंत्रियों और विधायकों के सिर पर फोड़ा।
कुछ सीटों के प्रत्याशी भी उनके निशाने पर रहे। ज्यादातर उम्मीदवारों ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वोटों के ध्रुवीकरण ने सियासी हालात बदल दिए।
उन्होंने भाजपा पर प्रचार तंत्र के जरिए मतदाताओं को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।
लगभग चार घंटे तक समीक्षा
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने जिला और शहर अध्यक्षों तथा महामंत्रियों के साथ करीब चार घंटे तक हार के कारणों की समीक्षा की। अधिकांश पदाधिकारियों का कहना था कि चुनाव के दौरान कई अफसर भाजपा एजेंट के रूप में काम करते नजर आए।
पार्टी मंत्री और विधायकों का भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कई जगह उन्होंने प्रत्याशियों का विरोध किया। सपा मुखिया के निर्देश पर जिला पदाधिकारियों ने ऐसे नेताओं, अफसरों की लिखित में शिकायत दे दी।
मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष ने दंगों को लेकर मीडिया पर गलत प्रचार करने का आरोप लगाया। बुलंदशहर के जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रत्याशी बदलना सपा के लिए ठीक नहीं रहा।
आगरा के महामंत्री मो. फारूख ने कहा कि प्रत्याशी का विलंब से घोषित होना और चुनाव प्रबंधन में खामी पार्टी को भारी पड़ी। मथुरा के जिलाध्यक्ष ने प्रत्याशी को ही कमजोर बताया। एक पदाधिकारी ने बांदा के प्रत्याशी की भी शिकायत की।
ध्रुवीकरण पर सवाल किए
बैठक के दौरान जब कई जिलाध्यक्षों ने हार की वजह ध्रुवीकरण बताई तो मुलायम बोले, साफ कहो कि राम मंदिर आंदोलन की तरह कट्टर हिंदू भाजपा के साथ चले गए। उन्होंने कहा, मुसलमानों के बारे में सपा नहीं सोचेगी तो कौन सोचेगा।
उन्होंने अध्यक्षों से कहा, मान लिया भाजपा को ध्रुवीकरण का लाभ मिला लेकिन जब ध्रुवीकरण हो रहा था तो इसे रोक क्यों नहीं पाए।
विधायकों की भूमिका पर सवाल
लखनऊ के एक पदाधिकारी ने विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाए तो रामपुर के जिलाध्यक्ष ने आजम खां पर चुनाव आयोग की पाबंदी को हार की वजह बताया।
भदोही के एक पदाधिकारी ने विधायक विजय मिश्र की छवि से नुकसान होने की बात कही। इस सीट पर उनकी बेटी सीमा मिश्र प्रत्याशी थीं।
प्रचार में नहीं गया बड़ा नेता
दास सहारनपुर के जिलाध्यक्ष और पार्टी के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय रामशरण दास के बेटे जगपाल दास ने कहा कि चुनाव में उनके और प्रत्याशी शाजान मसूद के अलावा न कोई मंत्री नजर आया और न ही संतरी। उन्होंने सीधे तौर पर प्रचार कमी को दोष दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद की मोदी पर टिप्पणी की सीडी आ जाने के बाद वोटों का ध्रुवीकरण और ज्यादा हो गया। यही हार की वजह बना।
ध्रुवीकरण रहा हार की वजह
गाजियाबाद के जिलाध्यक्ष ने कहा कि उनकी नियुक्ति काफी देरी से हुई। पुराना संगठन तो राज बब्बर को चुनाव लड़ा रहा था।
उन्होंने पूर्व अध्यक्ष पर काफी तल्ख टिप्पणी भी की। उन्होंने भी वोटों के ध्रुवीकरण को हार का का मुख्य कारण बताया।
नेताओं के बूथों का ब्यौरा एक सप्ताह में
सपा के सभी जिलाध्यक्षों को निर्धारित प्रारूप पर सभी मंत्रियों, दर्जाप्राप्त रहे मंत्रियों, मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के बूथों पर सभी दलों के प्रत्याशियों को मिले मतों का ब्यौरा मांगा है।
उन्हें प्रारूप पत्र दे दिया गया। जानकारी एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करानी होगी।
डबडबा गईं जयशंकर पांडेय की आंखें
फैजाबाद के जिलाध्यक्ष जयशंकर पांडेय चुनावी हार पर बोलते समय भावुक हो गए। उन्होंने कहा, चुनाव हारने के बाद वह समीक्षा बैठक में आना नहीं चाहते थे।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव की तुलना जयप्रकाश नारायण से की लेकिन पार्टी नेताओं पर समाजवादी विचारधारा से हटने का आरोप लगाया।
पुराने दौर के नेताओं के त्याग की याद दिलाते हुए उनकी आंखें डबडबा गईं।