समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बृहस्पतिवार को पार्टी नेताओं को सुधरने की नसीहत दी। कहा कि कुछ लोग जमीनों पर कब्जे, पैसे के लिए लूट-खसोट और दबंगई में लगे हैं। हमें सब मालूम है कि कौन क्या कर रहा है। इशारों ही इशारों में अपनी बात बोल देता हूं, कुछ नेता मान लेते हैं और सुधर भी जाते हैं।
विज्ञापन
मुलायम सिंह सपा मुख्यालय में पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की नौवीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, हमने मेहनत करके समाजवादी पार्टी बनाई। सपा के गठन के 11 माह बाद ही प्रदेश में सरकार बना ली। अब तक चार बार सपा की सरकार बन चुकी है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि 2017 में वे फिर से सरकार बनाएं तो उनकी उपलब्धि होगी। सरकार ने काम किए हैं। हमने संसद में भी यह बात कही थी।
उन्होंने कहा, एक दौर था कि लोग विश्वास नहीं करते थे कि प्रदेश से कांग्रेस को हटाया जा सकता है। उस समय समाजवादियों ने गैर कांग्रेसवाद का नारा दिया था। नौ राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें बनी थी।
विज्ञापन
'सभी दलों की सरकारें हटाना सीख गई है जनता'
- फोटो : amar ujala
यूपी में चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। अब जनता कांग्रेस, भाजपा, सपा समेत सभी दलों की सरकारें बनाना और हटाना सीख गई है। कार्यकर्ताओं को ऐसा व्यवहार रखना चाहिए कि प्रदेश से समाजवादी सरकार हटने न पाए।
सपा मुखिया ने कहा कि प्रदेश में फिर सपा सरकार बन सकती है लेकिन कुछ नेताओं के आचरण से नुकसान हो रहा है। कुछ लोग जमीनों पर कब्जे, पैसा, लूट-खसोट और दबंगई करते हैं। हमारे पास सबकी रिपोर्ट रहती है कि कौन क्या कर रहा है ? हमे पार्टी चलानी है, इसलिए बोल नहीं पाते। इशारों ही इशारों में बोल देते हैं, कुछ नेता मान लेते हैं और सुधार कर लेते हैं।
उन्होंने कहा, वर्करों में जागृति आई है, वे जिम्मेदार नेताओं, जिलाध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा कि हमें पत्र क्यों नहीं लिखते? कहा, हमारी पार्टी की छवि अलग होनी चाहिए।
ईमानदारी, शिष्टाचार होना चाहिए, गरीबों, दुखी लोगों की मदद करनी चाहिए। अन्याय का विरोध करना और न्याय का साथ ही समाजवाद है। कार्यकर्ता चन्द्रशेखर की पुण्य तिथि पर अन्याय के विरोध का संकल्प लेकर जाएं।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को मुलायम ने दी श्रद्घांजलि
- फोटो : amar ujala
मुलायम सिंह ने कहा, चन्द्रशेखर में एक खास गुण था। अपनों ही नहीं, विरोधियों के लिए भी उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते था। उनके शिष्टाचार का जवाब नहीं था।
आज के कार्यकर्ताओं को उनसे शिष्टाचार सीखना चाहिए तभी उनका सम्मान होगा, दूसरे दलों के लोग भी उनके प्रशंसक बनेंगे। दुख की घड़ी में विरोधियों के भी साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने चन्द्रशेखर से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। कहा कि उनके बराबर पदयात्रा किसी नेता ने नहीं की।
पहली बार किया लोकसभा से बहिर्गमन
सपा मुखिया ने कहा कि चन्द्रशेखर लोकसभा में बोलते थे तो उनकी बात गंभीरता से सुनी जाती थी। वह ओजस्वी वक्ता थे। बोलने के लिए कभी पर्ची या किताब का सहारा नहीं लेते थे। संसद में एक बार उन्होंने गांधी ट्रस्ट का मामला उठाया।
हमने उनका समर्थन करते हुए सरकार से सवाल किया। संतुष्ट न होने पर हमने सदन से बहिर्गमन कर दिया। चन्द्रशेखर दुविधा में फंस गए। उनके मुद्दे हम हाउस से बाहर आ गए। आखिर उन्हें भी बाहर आना पड़ा। उन्होंने पहली बार सदन का बहिर्गमन किया।