छोटी इकाइयों के पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री सूक्ष्म उद्यमी दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त से लागू होगी। योजना पांच साल तक प्रभावी रहेगी। योजना के तहत पंजीकरण शुरू हो गए हैं। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव एमएसएमई अमित मोहन प्रसाद ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश में कुल एमएसएमई इकाइयों में से 85 फीसदी बिना पंजीकरण के ही काम कर रही हैं। उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य न होने से एमएसएमई सेक्टर की अर्थव्यवस्था में इनकी वास्तविक हिस्सेदारी का पता नहीं चल पाता और नीतियां बनाने में दिक्कत होती है।
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योजना का मकसद असंगठित क्षेत्र में काम कर रहीं छोटी इकाइयों को संगठित क्षेत्र में लाना है। इससे इन इकाइयों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा। उद्योग निदेशालय केंद्र सरकार के यूआरसी पोर्टल पर इन इकाइयों को पंजीकृत कराएगा। योजना में 15 अगस्त तक पंजीकृत सभी उद्यमियों को 30 जून 2024 तक बीमा कवर दिया जाएगा। फिर अगले वित्तीय वर्षों में 30 जून तक पंजीकृत होने वाले उद्यमियों को एक जुलाई से तीस जून तक बीमा कवर दिया जाएगा।
जीएसटी में पंजीकृत उद्यमियों को लाभ नहीं
जीएसटी में पंजीकृत कारोबारियों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि उनके लिए अलग से मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना है। मुख्यमंत्री सूक्ष्म उद्यमी दुर्घटना बीमा योजना में 18 से 60 वर्ष तक के उद्यमी के दुर्घटनाग्रस्त होने पर पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी। पूरी प्रक्रिया आनलाइन होगी। योजना का लाभ लेने के लिए उद्यमी दस रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र ऑनलाइन अपलोड करेगा। ऑनलाइन पंजीकरण कराते ही योजना के अंतर्गत उसे पात्रता प्रमाण पत्र मिल जाएगा।