मुलाकात के दौरान मौजूद रहे वीआईपी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने बताया कि चुनाव से पहले दिल्ली, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल की तरह यूपी, बिहार व झारखंड में भी निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, नोनिया, धीवर, कश्यप को अनुसूचित जाति का आरक्षण देने के साथ ही परंपरागत अधिकार देने की मांग केंद्र सरकार से की जा रही है, लेकिन उनके स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इसलिए विकल्प के तौर पर एक मजबूत मंच की जरूरत है।
प्रभावित कर सकते हैं कई सीटों के समीकरण
सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि अगर ये सभी नेता मिलकर प्रदेश में चुनाव लड़ेंगे तो पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को प्रभावित करेंगे। साथ ही पूर्वांचल व बुंदेलखंड की कई सीटों पर सियासी समीकरण भी प्रभावित कर सकते हैं। भागीदारी संकल्प मोर्चा की रणनीति है कि सभी दल मिलकर निषाद, राजभर, प्रजापति, कुशवाहा सहित अन्य जातियों को एकजुट किया जाए।