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कोई भी बच्चा नहीं रहेगा मां के दूध से वंचित, KGMU में बनेगा प्रदेश का पहला मदर मिल्क बैंक

Thu, 07 Dec 2017 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अब किसी भी बच्चे को, किसी भी कारण से मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। यह संभव होगा केजीएमयू में बनने वाले प्रदेश के पहले मदर मिल्क बैंक की बदौलत। यह दूध बैंक ट्रॉमा सेंटर के पांचवें तल पर बनाया जाएगा। इसे शुरू करने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए केजीएमयू अफसरों के साथ एनएचएम व सहयोगी संस्था के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। तय हुआ है कि एनआईसीयू वार्ड में एक और क्वीन मेरी में दो मिल्क कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे।
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वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में बनने वाला मिल्क बैंक सेंटर फॉर एक्सीलेंस होगा। यहां काउंसलर प्रसूताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसका फायदा शिशु मृत्युदर में कमी के रूप में सामने आएगा। मां के दूध में विभिन्न तरह के पोषक पदार्थ होते हैं, जो नवजातों को विभिन्न बीमारियों व संक्रमण से भी बचाते हैं। ऐसी गुणवत्ता डिब्बाबंद दूध मे नहीं होती है। प्रो. भट्ट ने बताया कि मदर मिल्क बैंक बनाने में एनएचएम और उसकी सहयोगी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। आशा और एएनएम की मदद से गांव-गांव तक यह बात पहुंचाई जाएगी कि मां का दूध शिशु के लिए कितना जरूरी है। इसमें अच्छा काम करने वाली इकाइयों को सम्मानित भी किया जाएगा।

सेंटर निर्माण को लेकर केजीएमयू प्रशासनिक भवन में एक बैठक भी हुई। इसमें पीडियाट्रिक की विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि कुमार, माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता जैन, प्रो. माला कुमार एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से प्रो. अंजु अग्रवाल व पीजीआई से प्रो. एमएम गोडबोले व समेत निजी संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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छह माह तक काम आएगा दूध

प्रतीकात्मक फोटो
मदर मिल्क बैंक में इलेक्ट्रिक पंप मशीन होती है। इसके माध्यम से डोनर से दूध लिया जाता है। इस दूध का माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट होता है। रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता सही होने के बाद उसे कांच की बोतलों में 30.30 मिली लीटर की यूनिट बनाकर .20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर सुरक्षित रख दिया जाता है। बैंक में दूध छह माह तक सुरक्षित रहता है। दूध उन मांओं की काउंसलिंग कर लिया जाएगा, जिनके बच्चे पैदा होते ही किसी वजह से मर जाते हैं। इसके अलावा कुछ माताओं को दूध बहुत ज्यादा होता है। काउंसलिंग कर उन्हें समझाया जाएगा कि वह इसे किसी जरूरतमंद के लिए दान कर सकती हैं।

...इसलिए जरूरी है स्तनपान
प्रसव बाद मां को नहीं होता रक्तस्राव : स्तनपान न केवल नवाजातों के लिए फायदेमंद है बल्कि मां के लिए भी इसके अनेक फायदे हैं। डिलीवरी के आधे घंटे के अंदर अगर मां अपने बच्चों को स्तनपान करवाए तो मां प्रसव के बाद होने वाली ब्लीडिंग (पोस्ट पार्टम हेमरेज) से भी सुरक्षित रहती हैं जो कि प्रसूताओं के लिए सबसे ज्यादा जानलेवा होती है। वहीं पैदा होने के आधे घंटे के अंदर मिलने वाला दूध नवजात के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता : स्तनपान करवाने से मां के ब्रेन से ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है। इससे गर्भाशय संकुचित होता है और महिलाएं पोस्टपार्टम हेमरेज से बच जाती हैं। जन्म के बाद से बच्चे को मां का दूध देना शुरू कर देना चाहिए। मां के शुरुआती दूध को कोलेस्ट्रम कहते हैं। इसमें एंटीबॉडी होती है जो कि मां से बच्चे के शरीर में चला जाता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

ऊपरी दूध से संक्रमण व डायरिया का खतरा
 बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि नवजात को ऊपरी दूध पिलाने से बार-बार डायरिया व दूसरे संक्रमण हो जाते हैं। इससे बच्चे को बार-बार वायरल बुखार यहां तक कि निमोनिया का खतरा भी रहता है।
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