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UP: नौकरी के नाम पर 100 से ज्यादा बेरोजगारों से ठगी, दो फर्जी कॉल सेंटर से खेला गया ठगी का खेल, नौ गिरफ्तार

Wed, 18 Jun 2025 01:25 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ के बंथरा और सरोजनीनगर में चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटरों का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 100 से अधिक बेरोज़गार युवाओं से ठगी कर चुका था। नौ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

 
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फर्जी कॉल सेंटर चलाने वालों को गिरफ्तार किया गया। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बंथरा और सरोजनीनगर पुलिस ने नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर 100 से ज्यादा बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए नौ जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी दो साल से दो फर्जी कॉल सेंटर चलाकर युवाओं को ठग रहे थे।
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डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को बंथरा पुलिस ने आजाद विहार कॉलोनी स्थित एक मकान में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए बंथरा निवासी अजय प्रताप सिंह, बिहार के वैशाली निवासी संतोष कुमार, बंथरा के अमित सिंह, सरोजनीनगर की वैशाली सिंह और आरती सिंह को गिरफ्तार किया।

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मौके से 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार पैनकार्ड, छह डेबिट कार्ड, तीन आधार कार्ड, तीन ई श्रम कार्ड, छह पासबुक, तीन चेकबुक और दो डायरी बरामद हुए। आरोपी अजय व अमित मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले हैं। इसी तरह सरोजनीनगर पुलिस ने कानपुर अंडरपास स्थित एक बिल्डिंग में चल रहे कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर वहां से सरोजनीनगर निवासी कुलदीप व प्रियंका, बंथरा निवासी शालू और आंचल शर्मा को गिरफ्तार किया। मौके से आठ मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, दो इंटरनेट डिवाइस व एक कार बरामद की। आरोपी कुलदीप मूल रूप से रायबरेली के लालगंज बेसवारा का रहने वाला है।

इस तरह करते थे ठगी:

डीसीपी ने बताया कि आरोपी नोएडा की एक कंपनी से 15 हजार रुपये महीने पर बेरोजगारों का बायोडाटा खरीदते थे। इसके बाद जालसाज टेलीकॉलिंग के माध्यम से बेरोजगारों को एयर इंडिया, टाटा मोटर्स, टीसीएस, विस्तारा एयरलाइन व अन्य नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। दस्तावेज सत्यापन, पुलिस सत्यापन व अन्य मदों में 10 से 20 हजार रुपये तक वसूल कर उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दे देते थे।

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फर्जी नाम वाले सिम और खातों का इस्तेमाल

डीसीपी ने बताया कि उक्त दोनों कॉल सेंटर दो साल से चल रहे थे। अभी तक की गई छानबीन में इस बात का पता चला कि जालसाज ठगी के लिए फर्जी नाम व पते पर खरीदे गए सिम कार्ड व बैंक खातों का प्रयोग करते थे। फर्जी खाता राजस्थान के कोटा का निवासी राहुल आरोपियों को देता था। इसके एवज में 20-22 प्रतिशत रुपये लेता था। ठगी के इस धंधे में एक जालसाज संदीप सिंह का भी नाम भी सामने आया है। पुलिस उसके बारे में पता लगा रही है।


ये सावधानियां बरतें युवा

  • ऑनलाइन आवेदन करते समय सतर्क रहें, संदिग्ध लिंक न करें।
  • व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतें। कोई कॉल संदिग्ध लगे तो उसे अनदेखा करें।
  • नौकरी देने वाली कंपनियां कोई फीस नहीं लेती हैं। यदि कोई रुपये मांगे तो होशियार हो जाएं।
  • जिस कंपनी में नौकरी दिलाने की बात कही जा रही है, उससे सीधे संपर्क करें।
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