नोटबंदी के चलते बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारों के बीच आरबीआई भले ही यह दावा कर रहा हो कि सभी बैंकों को जरूरत भर के नए नोट उपलब्ध कराए जा रहे हैं... पर यूपी की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
सूबे के करीब 10 करोड़ लोगों के विभिन्न बैंकों में खाते हैं जिनमें सात लाख करोड़ रुपये जमा हैं। पर, नोटबंदी के बाद 10 दिन में यूपी में बैंकों को सिर्फ 8 हजार करोड़ रुपये की करेंसी ही उपलब्ध कराई गई।
यानी, कुल जमा रकम का महज एक फीसदी। इसके और आसान तरीके से कहें तो प्रति खाताधारक सिर्फ 800 रुपये। एटीएम और बैंक शाखाओं में भारी भीड़ की यह एक बड़ी वजह है।
प्रदेश के वित्त महानिदेशक शिव सिंह यादव ने शनिवार को प्रमुख बैंकों क अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आरबीआई से जरूरत भर कैश सप्लाई करने को कहा है। प्रदेश को सप्लाई हो रही नई करेंसी की सोमवार को मॉनिटरिंग की जाएगी।
जनता ने सहयोग किया, आरबीआई ने भेदभाव
आरबीआई और विभिन्न बैंकों के साथ बैठक के बाद राज्य के लीड बैंक (बैंक आफ बड़ौदा) प्रभारी बीएस ढाका और शिव सिंह के अनुसार देश में सबसे ज्यादा 10 करोड़ बैंक खाताधारक यूपी के हैं। 500 व 1000 के नोट बंद होने के फैसले पर इन खाताधारकों ने हर तरह से सहयोग किया, लेकिन उनके साथ भेदभाव किया गया।
आरबीआई ने जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं भेजे जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ढाका के अनुसार 10 दिनों में प्रदेश को 12 हजार करोड़ रुपये की नई करेंसी की जरूरत थी। कम पैसा मिलने के चलते ग्राहकों को भी निर्धारित सीमा से कम पैसा दिया जा रहा है।
यूपी के हिस्से की दूसरे राज्यों से करेंगे तुलना
वित्त महानिदेशक ने बताया कि प्रदेश सरकार आकलन कर रही है कि दूसरे राज्यों को उनके बैंक खातों और जमा राशि के अनुपात में नई करेंसी की कितनी सप्लाई की गई। यूपी को कितना कम हिस्सा मिला। इसकी रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी।
20 हजार एटीएम, सिर्फ दो हजार कैलिब्रेट
बीएस ढाका ने दावा किया कि प्रदेश में सभी बैंकों के कुल 20 हजार एटीएम सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से सिर्फ दो हजार एटीएम को दो हजार के नए नोट बांटने के लिए कैलिब्रेट किया जा सका है। उन्होंने माना कि बड़ी संख्या में एटीएम खराब पड़े हैं। पर, वे इनकी संख्या नहीं बता रहे हैं।