सिविल पुलिस में बिना दौड़ के पदोन्नति दे दी जाती है। वर्ष 2017 में करीब 4,700 कांस्टेबल को पदोन्नति देकर हेड कांस्टेबल और फिर पिछले महीने ही दूसरी पदोन्नति देकर इन्हें उपनिरीक्षक बना दिया गया। दोनों पदोन्नति में दौड़ नहीं कराई गई।
पुलिस महकमे में पदोन्नति की व्यवस्था समान होने पर भी पीएसी, सशस्त्र पुलिस व फायर सर्विस में पदोन्नति के लिए दौड़ कराई जाती है। ऐसे में भेदभाव पर सवाल उठते हैं। पीएसी, सशस्त्र पुलिस व फायर सर्विस के जवान कहते हैं कि 40 पार वाले पुलिसकर्मियों को अधिकारी परेड में शामिल होने से छूट दे देते हैं तो फिर पदोन्नति के लिए आखिर उन्हें छूट क्यों नहीं दी जाती।
महानगर के पीएसी ग्राउंड पर ही इसी साल एक अगस्त को पीएसी के हेड कांस्टेबलों की प्लाटून कमांडर पद पर प्रोन्नति के लिए दौड़ कराई गई थी। इसमें एक पैर के हेड कांस्टेबल तक को दौड़ा दिया गया था। जिसका बरसों पहले बीमारी के चलते डॉक्टरों ने एक पैर काट दिया था। वह लकड़ी के कृत्रिम पैर के सहारे चलता है, मगर पदोन्नति के लिए दौड़ से उसे छूट नहीं दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस हेड कांस्टेबल ने दौड़ पूरी कर ली थी, मगर कमेटी की संस्तुति की रिपोर्ट के बाद ही पदोन्नति दी जाएगी।