देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए शौचालय निर्माण की कागजी रिपोर्ट केंद्र मानने को तैयार नहीं है। केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय ने कहा है कि बने शौचालयों की फोटो उसकी वेबसाइट पर अपलोड न की तो पैसा नहीं मिलेगा।
कई जिलों में पैसा खर्च होने व शौचालय बनने की फोटो अपलोड करने में काफी अंतर मिला है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में शौचालय निर्माण व जागरूकता गतिविधियों के लिए काफी पैसा दिया जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने इसके लिए वर्षवार शौचालय निर्माण का लक्ष्य तय किया है। पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि पुराने अनुभवों को देखते हुए केंद्र की मौजूदा सरकार ने निर्माण कार्य निगरानी की दोहरी व्यवस्था बनाई है।
इस तरह की मिल रही हैं गड़बड़ियां
शौचालय निर्माण की कागजी रिपोर्ट देने के साथ ही उसके बनने की अलग-अलग स्टेज पर फोटो भी वेबसाइट पर अपलोड कराई जानी है।
ज्यादातर जिले शौचालय निर्माण की संख्या ज्यादा बता रहे हैं, लेकिन शौचालय बनने की फोटो वेबसाइट पर कम अपलोड की गई है।
मसलन, शाहजहांपुर में बीते नवंबर तक 20879 शौचालय बनवाने की बात कही गई है। मगर, वेबसाइट पर सिर्फ 10383 शौचालयों की ही फोटो अपलोड कराई गई है।
इसी तरह, पीलीभीत में 8014 शौचालय इसी समय तक बनाने की बात कही गई है। पर, यहां 5348 शौचालयों के फोटोग्राफ ही अपलोड हुए हैं। ऐसी ही स्थिति तमाम दूसरे जिलों की भी है।
...और अधिक पैसा देने के लिए तैयार है केंद्र
मंत्रालय उपलब्ध धन खत्म होने पर अतिरिक्त रकम देने को तैयार है। मगर, जो रकम खर्च की गई है उससे बने शौचालयों की फोटो तय प्रक्रिया के हिसाब से मंत्रालय की वेबसाइट पर जरूर अपलोड होनी चाहिए।
खर्च रकम की पूरी फोटो अपलोड किए बिना धनराशि अवमुक्त नहीं की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव आलोक रंजन व निदेशक पंचायतीराज ने अलग-अलग मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, मंडलीय उप निदेशकों व जिला पंचायतराज अधिकारियों को केंद्र के निर्देशानुसार कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।