चुनाव जीतने के बाद भी ठेकेदारी करने के मामले में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह व भाजपा विधायक बजरंग बहादुर के खिलाफ जांच पूरी हो गई है।
लोकायुक्त अगले सप्ताह अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज सकते हैं। इनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
बलिया के सुभाष चंद्र सिंह उर्फ क्रांतिकारी ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा से उमाशंकर की शिकायत करते हुए विधायक बनने के बाद भी ठेकेदारी करने का आरोप लगाया है।
शिकायत में उमाशंकर सिंह के कई साझीदारों का उल्लेख करते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी व टी. राम की हिस्सेदारी का आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि जांच के दौरान शिकायतकर्ता नसीमुद्दीन व टी. राम की हिस्सेदारी के बारे में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सके हैं।
जांच शुरू होने के बाद भाजपा विधायक भी इसके लपेटे में आ गए। लोकायुक्त ने 15 मार्च 2015 के बाद विधायकों के ठेके दारी करने पर जांच केंद्रित रखी है क्योंकि कानूनन विधायक बनने के बाद वे ठेकेदारी नहीं कर सकते।
विधायकों ने दिए जवाब
उमाशंकर सिंह ने कानूनी सलाहकारों के जरिये तीन बार में लोकायुक्त को लंबा-चौड़ा जवाब भेजा है लेकिन जिस बिंदु पर जांच की जा रही है उस पर वह चुप्पी साधे हुए हैं।
बजरंग बहादुर ने अपने जवाब में कहा है कि उनकी जांच करना लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, क्योंकि उनकी कोई शिकायत नहीं हुई है।
पंजीकरण कराना गैरकानूनी नहीं है। ठेकों पर बजरंग बहादुर ने भी कोई जवाब नहीं दिया है। लोकायुक्त संगठन के सूत्रों का कहना है कि दोनों विधायकों के जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है।
जांच प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। अगले सप्ताह तक लोकायुक्त इस मामले में राज्यपाल को रिपोर्ट भेज सकते हैं।