हम
साइबर युग में आ गए हैं। यही वजह है कि साइबर क्राइम भी बहुत तेजी से बढ़
रहा है और इस तरह के क्राइम को रोकने के लिए पुलिस भी तैयार हो रही है।
अलग
से साइबर सेल बनाने की शुरुआत 2010 में हुई थी। पहली साइबर सेल लखनऊ में
2012 में सक्रिय हुई। दो साल के भीतर प्रदेश के हर जिले में साइबर सेल गठित
करने में सफल रहे।
अब साइबर थानों की बारी है। पहला साइबर थाना नोएडा में
बनने जा रहा है। इसे सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद लखनऊ, मेरठ,
आगरा, बरेली, कानपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी में साइबर थाने बनेंगे।
इसके लिए संसाधन और प्रशिक्षित लोग चाहिए। इनका प्रस्ताव भी भेजा जा चुका
है। जल्द ही आठों जिलों में साइबर थाने होंगे।
बैंकिंग फ्रॉड के ज्यादा मामलेसाइबर
क्राइम में जो मामले आ रहे हैं, उनमें ज्यादातर आर्थिक और सामाजिक अपराध
से जुड़े हैं। आर्थिक अपराध में ज्यादातर डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और
नेट बैंकिंग से जुड़े हैं।
पासवर्ड हासिल कर लेने, कार्ड का क्लोन बना लेने
सहित कई तरह से धोखाधड़ी हो रही है। हाल ही में नोएडा और लखनऊ से जुड़ा एक
मामला था।
उसमें धोखाधड़ी करने वाले मोबाइल चोरी की रिपोर्ट लिखाकर
खाताधारक का सिम ब्लॉक करा देते थे ताकि अकाउंट से रकम निकालने पर उसके पास
मैसेज भी न पहुंचे। इस तरह के नए ट्रेंड पर भी हम नजर रख रहे हैं।
इसके
बाद सामाजिक अपराध ज्यादातर छेड़खानी से जुड़े हैं। खासकर फेसबुक पर
लड़कियों के न्यूड फोटो डाल देना। इसी तरह फेसबुक पर लड़कियों की फर्जी
आईडी बनाकर कॉलगर्ल लिखकर उसके मोबाइल नंबर और फोटो डाल देते हैं।
फर्जी
आईडी के जरिए राजनेताओं को भी लोग पीड़ित करते हैं। किसी नेता के नाम से
फर्जी आईडी बनाकर उसी पार्टी के बड़े नेता को गालियां लिख देते हैं।
जागरूकता के लिए चलेगा अभियानसाइबर
क्राइम के प्रति जागरूकता से इस पर काफी हद तक लगाम लग सकती है। इसके लिए
हम अभियान चला रहे हैं। अभी हमने स्कूलों में छात्राओं को जागरूक करने के
लिए कई वर्कशॉप की हैं।
अब बैंक से जुड़े धोखाधड़ी के मामले रोकने के लिए
शॉपिंग मॉल, एटीएम एवं बैंकों के आसपास जागरूक करने वाले निर्देश लिखवाए
जाएंगे। इसके लिए पर्चे छपवाए जा रहे हैं, जो जगह-जगह चिपकाए जाएंगे।
मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है।
तेजी से बढ़ रहा साइबर क्राइमसाइबर
क्राइम का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसे बताने के लिए एक साल के
आंकड़े ही काफी हैं। वर्ष 2012 में साइबर क्राइम के 21 मामले लखनऊ में दर्ज
किए गए थे।
वहीं, अगले साल 2013 में 110 मामले दर्ज हुए। इसकी एक वजह यह
भी है कि आम जनता और पुलिस दोनों में जागरूकता भी आई है। पहले इस तरह के
मामले रिपोर्ट ही नहीं होते थे।