लखनऊ। गाजीपुर इलाके से 27 सितंबर से लापता सरकारी शिक्षक का शव शुक्रवार दोपहर सीतापुर के जंगल में पड़ा मिला। शव सड़ गया था और शरीर पर चोट के निशान भी थे। मोबाइल की मदद से पुलिस ने शिनाख्त की। खबर पाकर परिजन सीतापुर पहुंच गए। उन्होंने हत्या की आशंका जताई है। वहीं, गाजीपुर पुलिस का कहना है कि शिक्षक कर्ज से परेशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत की सही वजह पता चल सकेगी।
इंदिरानगर सी-ब्लाॅक निवासी अनुज अग्रवाल (45) सीतापुर के रवासी जूनियर विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। परिवार में पत्नी मोनिका और दो बच्चे हैं। वह 27 सितंबर की सुबह आठ बजे घर से सीतापुर ब्लाॅक रिसोर्स सेंटर ( बीआरसी) जाने की बात कहकर निकले थे। सुबह 11.30 बजे पत्नी की उनसे फोन पर बात हुई थी। उन्होंने शाम चार बजे तक लौटने की बात कही थी।
रात होने पर जब वह नहीं लौटे तो परिजनों ने कॉल की। संपर्क न होने पर पत्नी ने देर रात गाजीपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने जब उनकी कॉल डिटेल खंगाली तो एचडीएफसी बैंक के लोगों के नंबर मिले। पुलिस ने जब उन नंबरों पर संपर्क किया तो पता चला कि अनुज ने बैंक से 12 लाख रुपये का कर्ज लिया था। नौ ईएमआई जमा नहीं की थीं।
बैंक के कर्ज से थे परेशान
अनुज का शव शुक्रवार दोपहर सीतापुर के नैमिषारण्य राजघाट के जंगल में लोगों ने पड़ा देखा। शव औंधे मुंह पड़ा था। पास में ही पानी की बोतल और कुछ खाने का सामान भी था। इंस्पेक्टर गाजीपुर विकास राय के अनुसार, जांच में पता चला है कि अनुज ने बैंक के अलावा कई लोगों से कर्ज ले रखा था। वह पत्नी व अन्य परिचितों से कई बार आत्महत्या करने की बात कह चुके थे।