मिस्ड कॉल करने वाला हर व्यक्ति यह न सोचे कि वह भाजपा का सदस्य हो गया है। सदस्य बनने के लिए फार्म भरने से लेकर अन्य कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। साथ ही भाजपा के पुराने लोगों के कुछ सवालों के जवाब भी देने होंगे। इस कसौटी पर खरे उतरने के बाद ही वह भाजपा का सदस्य बन पाएगा।
मिस्ड कॉल करने वाला कोई व्यक्ति आपराधिक या दागी छवि का है तो उसे सदस्यता नहीं दी जाएगी। अगर कोई पहले भाजपा छोड़कर गया है तो उसके बारे में भी उस समय की स्थितियों का विश्लेषण करते हुए फैसला किया जाएगा। ऐसे लोगों की भी भाजपा में आने की राह मुश्किल होगी, जिनके खिलाफ भाजपा के ही किसी कार्यकर्ता के उत्पीड़न को लेकर आपराधिक मामला है।
दरअसल, पार्टी ने जब ऑन लाइन सदस्यता का अभियान शुरू किया था तो संगठन के भीतर ही नहीं बल्कि समर्थकों के भी बीच यह आशंका उठी थी कि इस प्रक्रिया से तो कोई भी भाजपा का सदस्य बन जाएगा। उसकी छवि व पृष्ठभूमि कैसी है, इस बारे में पार्टी के पास कोई जानकारी ही नहीं होगी। इसका भविष्य में पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
कभी कोई विवाद खड़ा हुआ तो ऐसे लोगों के कारण पूरी पार्टी की साख दांव पर लग सकती है। यह आशंकाएं भी जताई गई थी कि इस प्रक्रिया का दूसरे दलों के अवसरवादी तत्व भी लाभ उठा सकते हैं। वे मौका आने पर खुद को भाजपा का सदस्य बताकर गड़बड़ कर सकते हैं।
चुनाव में टिकट की भी मांग कर सकते हैं। माना जाता है कि इन्हीं सब आशंकाओं के मद्देनजर पार्टी रणनीतिकारों ने महासंपर्क अभियान के तहत पूरी जांच पड़ताल कराने का फैसला किया। जिससे इन आशंकाओं को टाला जा सके।
देखेंगे किसे बनाना है और किसे नहीं
भाजपा के राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी डॉ. दिनेश शर्मा कहते भी हैं कि महासंपर्क अभियान के तहत मिस्ड कॉल करने का मतलब पार्टी का सदस्य बन जाना नहीं है। मिस्ड कॉल तो बहुत लोगों ने की है। महासंपर्क अभियान के तहत यह देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति पार्टी का वास्तव में सदस्य बनना चाहता है।
जो सदस्य बनना चाहता है, उसे सदस्य बनाना ठीक रहेगा या नहीं। अन्य कई जानकारियों भी जुटाई जाएंगी। पार्टी के पुराने लोग मिस्ड काल करने वाले से मिलकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि उसे सक्रिय सदस्यता देकर कोई जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है या वह सिर्फ साधारण सदस्य या शुभचिंतक बनकर पार्टी के साथ काम करना चाहता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और कामधाम के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। छवि का पता लगाने के साथ यह जानने की भी कोशिश होगी कि वह भाजपा के साथ आखिर क्यों जुड़ना चाहता है। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही पार्टी की औपचारिक सदस्यता दी जाएगी।
...इसलिए की जा रही है जद्दोजहद
पार्टी के रणनीतिकार दुविधा में फंसे हैं। एक तरफ संगठन का जनाधार बढ़ाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ पार्टी के चेहरे को साफ सुथरा रखने की चिंता। इसीलिए तय किया गया है कि पार्टी में शामिल होने वालों की पूरी कुंडली बांचकर उसे लेने या न लेने पर फैसला किया जाए।
भाजपा के एक महामंत्री कहते हैं कि लोगों में भाजपा के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। लोगों को दिख रहा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का सहारा लेकर विधायक बनना ज्यादा आसान है।
कोई अपनी पार्टी को छोड़कर भाजपा से जुड़कर भविष्य को संवार लेना चाहता है तो कोई राजनीति के पारी ही भगवा दल के साथ शुरू करने की इच्छा पाले हैं।
कुछ ऐसे भी भाजपा में भविष्य संवर जाने का सपना देख रहे हैं जिनके चेहरे कानून तोड़ने के कारण समाज की नजर में दागदार माने जा रहे हैं। इसीलिए कुछ कसौटी तय करनी पड़ी है।