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हनुमान मंदिर के इन चमत्कारों को तो सुना होगा आपने?

Tue, 12 May 2015 03:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लख्ानऊ
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भारत में ऐसे तमाम मंदिर हैं जिनके बारे में कई धार्मिक आस्थाएं और मान्यताएं जुड़ी होती हैं। हर मंदिर के पीछे कोई न कोई कहानी भी होती है। ये चमत्कारिक कहानियां सुनने के बाद ही लोगों की आस्थाएं बढ़ जाती हैं।
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लक्ष्मणनगरी यानी लखनऊ से से भगवान हनुमानजी का नाता बहुत पुराना है। यहां भगवान हनुमान के कई चमत्कारी मंदिर है। आप शायद ही इनके पीछे की मान्यताओं के बारे में जानते होंगे।

ज्येष्ठ के महीने के हर मंगल पर शहर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की आस्था देखते ही बनती है। शहर के कुछ चुनिंदा मंदिर ऐसे हैं जहां बजरंगबली ने कई बड़े चमत्कार भी करके दिखाए हैं।
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कुंए में छाछ के साथ निकली थी हनुमान जी की मूर्ति

कुंए की खुदाई में आपने पानी को निकलते तो कई बार देखा होगा। मगर किसी ‌कुंए में से अगर छाछ निकले तो आप जरूर हैरान रह जाएंगे।

ये चमत्कारी कहानी है लखनऊ के चौक में स्थित छाछी कुआं मंदिर की है। कहा जाता है कि 1584 के आसपास एक बारात इस मंदिर कैंपस में ठहरी थी।

बारातियों के जलपान के लिए जब महंत के शिष्य ने कुंए में बाल्टी डाली तो यहां पानी की जगह छाछ निकली। इस घटना के बाद इस मंदिर का नाम छाछी कुंआ मंदिर पड़ गया।

इसी कुंए से बजरंगबली की एक प्रतिमा भी निकली। कुंए से निकली इस म‌ूर्ति को मंदिर में प्रतिस्‍थापित किया गया। इस प्राचीनतम मंदिर की स्‍थापना बाबा परमेशवर दास ने की थी।

रबिया बेगम के सपने आए थे हनुमान जी

अलीगंज स्थित पुराना हनुमान मंदिर त्रेतायुग का बताया जाता है। पुराने अलीगंज हनुमान मंदिर की मान्यता ये है कि सीता माता को  वनवास ले जाते समय लक्ष्मण और हनुमान यहीं रूके थे।

अवध के तत्कालीन नवाब मुहम्मद अली शाह की बेगम रबिया के जब कई वर्षो तक कोई संतान नहीं हुई और बहुत से हकीम-वैद्यों की दवाइयों और पीर-फकीरों की दुआओं ने भी जवाब दे दिया, तब कुछ लोगों ने उन्हें इस्लामाबाड़ी की बाबा के पास जाकर दुआ माँगने की सलाह दी।

कहते हैं कि वे इस्लामाबाड़ी गई और सन्तान की कामना की। उनकी अभिलाषा पूरी हुई। ऐसी किंवदन्ती है कि जब वे गर्भवती थीं, तब उन्हें फिर स्वप्न हुआ, जिसमें उनके (गर्भस्थ) पुत्र ने उनसे कहा कि 'इस्लामबाड़ी में उसी जगह हनुमान जी की मूर्ति गड़ी है' उसे निकलवाकर किसी मन्दिर में प्रतिष्ठित किया जाये।

फलत: बच्चे के जन्म के बाद रबिया बेगम वहाँ गयीं और नवाद के कारिन्दों ने टीला खोद डाला तथा नीचे से मूर्ति निकाल ली गयी। बाद में उसे साफ सुथरा करके, नवाबी आदेश से सोने-चाँदी तथा हीरे-जवाहरात से मंण्डित एक हौदे पर बैठाकर हाथी पर रखा गया, जिससे आसफुदौला के बड़े इमामबाड़े के पास ही उसे प्रतिष्ठापित करके मन्दिर बनवाया जाये।

फिर जब बेगम को स्वप्न में हनुमानजी ने दर्शन दिए तो उन्होंने मंदिर बनवाकर मूर्ति स्‍थापित करवाई और उन्हे पुत्र की प्राप्ति हुई। जिसका नाम उन्होंने मंगत राय फिरोज शाह रखा।

हाथी पर बैठकर यहां विराजे थे बजरंगबली

अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर के पास में ही बना नया मंदिर करीब 250 साल पुराना है। इस मंदिर को बेगम के सिपहसालार जठमल ने बनवाया था।इस्लामाबाड़ी की खुदाई में निकली मूर्तियों को सोने-चांदी व हीरो से सजाकर हाथी पर रखा गया।

इस मूर्ति को पहले बड़े इमामबाड़े के पास मंदिर बनाकर स्‍थापित करने की योजना थी। लेकिन जब मूर्ति को प्रतिस्‍थापित कराने के लिए ले जाया जाने लगा तो हाथी रुक गए और महावत की लाख कोशिशें के बाद भी नहीं उठे।

इस्लामाबाड़ी के साधु ने बेगम को बताया कि गोमतीपार लक्ष्मण जी का क्षेत्र है, जहां हनुमान जी नहीं जाना चाहते। लिहाजा मूर्तियों को वहीं स्‍थापित कर दिया गया। बाद में महमूदाबाद के राजा ने मंदिर को आसपाद की काफी जमीन दे दी। यहां हर साल जेठ के मंगलों पर मेला लगता है।

175 सालों से पाताल में लेटे हैं पवनसुत

लेटे हुए हनुमानजी को अहिमर्दन पातालपुरी हनुमान के नाम से जाना जाता है। लक्ष्मण टीले के पास स्थित ये मंदिर के पीछे भक्तों की कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

इस मंदिर में पिछले करीब 175 सालों से बंजरंगबली लेटे हुए हैं। आमतौर पर लेटी हुई अवस्‍था में हनुमानजी की मूर्ति देखी नहीं जाती। इस वजह से भी लोगों की आस्‍था इस मंदिर में बढ़ गई है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां बजरंगबली की छह फीट की लेटी हुई प्रतिमा है।

इस प्रतिमा के इर्द-गिर्द राम व लक्ष्मण और पैरों की ओर मकरध्वज व अहिरावण की बहन दूरातांदी की मूर्ति है। अहिरावण की बहन ने ही अहिरावण तक पहुंचने में हनुमान जी की मदद की थी। मान्यता है कि मंदिर की प्रतिमा गोमती नदी में बहकर यहां तक पहुंची। इस मूर्ति की जानकारी लंबे अरसे तक किसी को नहीं थी।
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बाढ़ में भी डटे रहे थे बजरंगबली

लक्ष्मणनगरी के हनुमान सेतु मंदिर से भी लोगों की बहुत सी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई है। इस चमत्कारिक मंदिर के पीछे भी ऐसी ही एक कहानी है जिसकी वजह से इसमें लोगों की आस्‍था बढ़ गई।

ऐसा कहा जाता है कि 1960 में जब यहां बाढ़ आई थी तो बाबा नीम करौरी आश्रम स्थि‌त हनुमान मंदिर में बजरंगबली की मूर्ति को छोड़कर सब कुछ बह गया था।

बाढ़ के बाद हुए इस चमत्कार के बाद लोगों की आस्‍था बढ़ गई। इस मूर्ति को दोबारा स्‍थापित कराया गया। बाबा ने इस मूर्ति का मुंह सड़क की ओर करवाया ताकि आने-जाने वालों को पवनसुत के दर्शन आसानी से हो सकें। हनुमान सेतु की गणना लखनऊ के प्रसिद्ध् मंदिरों में होती है।
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