फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एलडीए: नौकरी के लिए 14 साल लड़ी बेटी, एलडीए में कनिष्ठ लिपिक के पद पर मिली नियुक्ति

Sun, 17 Sep 2023 03:53 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ

सार

मेराज फातिमा ने अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए करीब 14 साल संघर्ष किया। उनके पिता का 2008 में निधन हो गया था। एलडीए में अनुकंपा पर यह किसी बेटी की पहली नियुक्ति है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूं तो मायावती, अखिलेश यादव भी यूपी के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए मेराज फातिमा का 14 साल के संघर्ष का वनवास योगी सरकार ने ही खत्म किया। अनुकंपा नौकरी पाने के लिए मेराज फातिमा का संघर्ष मायावती सरकार में शुरू हुआ था। तब बेटी को अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान नहीं था। अखिलेश सरकार ने भी इसके लिए कुछ नहीं किया। जब योगी सरकार आई तो फातिमा ने सीएम को पत्र लिखा। योगी आदित्यनाथ दोबारा सत्ता में आए तो बेटियों को अनुकंपा नौकरी देने का प्रावधान कर नवंबर 2021 में शासनादेश जारी कराया। इसके तहत फातिमा की आठ सितंबर को एलडीए में कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्ति हुई। 15 सितंबर को उन्होंने जनसंपर्क अनुभाग में ज्वॉइन किया। फातिमा को करीब 35 हजार रुपये वेतन मिलेगा। एलडीए में अनुकंपा पर किसी बेटी की यह पहली नियुक्ति है।

विज्ञापन


2008 में हुआ था पिता का निधन
फातिमा के पिता मुस्तफा का 28 दिसंबर 2008 को निधन हुआ था। बेटा न होने से लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 2001 में मॉस कम्युनिकेशन से एमएससी करने वाली बेटी फातिमा ने परिवार के जीवन यापन के लिए अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया। उसके संघर्ष को लखनऊ विकास प्राधिकरण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह, महामंत्री दिनेश शुक्ला ने आसान किया। हालांकि, अफसरों ने अनुकंपा नौकरी को लेकर नियमों का हवाला देकर अड़ंगे लगा दिए। फिर भी फातिमा ने उम्मीद नहीं छोड़ी। जब योगी सरकार ने बेटियों को अनुकंपा नौकरी देने का शासनादेश जारी किया तो एलडीए उपाध्यक्ष डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने एक बार फिर फातिमा की फाइल चलवाई, जिस पर मुहर लगा दी गई।

ये भी पढ़ें - मुख्यमंत्री योगी ने पीएम विश्वकर्मा योजना का किया शुभारंभ, बोले- प्रधानमंत्री मोदी नए भारत के शिल्पी
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सीएम योगी ने दी कड़ी हिदायत, पेश की गई टॉप व बॉटम अफसरों की सूची
विज्ञापन


खुशी है कि न्याय मिला : फातिमा
हरदोई रोड के सरफराजगंज निवासी मेराज फातिमा का कहना है कि इतने लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलने की खुशी है। हालांकि, इसमें 14 साल की देरी से करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। एलडीए को इसकी क्षतिपूर्ति करनी चाहिए, जिनके अफसरों के अड़ंगे से नियुक्ति में देरी हुई। उन अधिकारियों को आभार जिन्होंने मुझे नौकरी दिलवाने में सहयोग दिया।

हर हफ्ते आती थी फातिमा
एलडीए के उपाध्यक्ष डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि फातिमा का अनुकंपा नौकरी का प्रत्यावेदन शासन में अरसे से लंबित था। वह हर हफ्ते मेरे सामने आ खड़ी होती और यही सवाल करती कि मेरी फाइल का क्या हुआ? इस पर मैंने अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण से उसकी फाइल पर निर्णय लेने का अनुरोध किया। तीन घंटे तक मंथन के बाद शासनादेश के आधार पर अनुमोदन मिल गया तो नियुक्ति कर दी गई।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें