वो दिमागी रूप से बीमार है, उसे अपना नाम-पता भी मालूम नहीं है। रात दो बजे सड़क पर दर्द से कराह रही थी। उसे तो यह भी नहीं पता था कि दर्द क्यों हो रहा है। उम्मीद की नजर से इधर-उधर देख रही थी। उसे पागल समझकर अपनों ने छोड़ दिया लेकिन किसी दरिंदे ने उसे भी नहीं छोड़ा। वहां से गुजर रहे एसके निषाद ने महिला को देखा और उससे पूछा की क्या हुआ लेकिन महिला कुछ नहीं बता पा रही थी। इसके बाद एसके निषाद ने डायल 112 पर फोन किया और पुलिस की मदद ली। पीआरवी वहां पहुंचती तब तक महिला ने बच्ची को जन्म दे दिया था।
पीआरवी 0501 के कमांडर इंद्रभूषण तिवारी ने बताया कि जब वो वहां पहुंचे तो महिला और बच्ची दोनों जमीन पर थे। उन्होंने आसपास के लोगों से तौलिया, कपड़ा मांग कर महिला को पहनाया और तुंरत महिला सिपाही चंदा को भी बुलाया। इस दौरान एंबुलेंस से महिला और बच्ची को लोहिया अस्पताल पहुंचाया। जहां दोनों का इलाज चल रहा है। वहीं पीआरवी सब कमांडर कृष्ण कुमार सिंह ने डॉक्टरों को अपना नंबर दिया औऱ कहा पैसे, रुपये और खून किसी भी चीज की जरूरत पड़े तो फोन करें।
वहीं पॉवर विंग्स की टीम भी मदद के लिए पहुंच गई। पॉवर विंग्स की अध्यक्ष सुमन रावत ने कहा कि जब तक बच्ची और मां को चाइल्ड लाइन नहीं भेजा जाता तब तक दोनों की जिम्मेदारी टीम पॉवर विंग्स की रहेगी। उन्होंने बच्चे के लिए कपड़े, तौलिया, दूध की बोतल और दो बेबी किट के साथ ही महिला के लिए गाउन, खाने का सारा सामान दिया।