समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव दिल से भी मुलायम थे। सादगी ऐसी कि पार्टी कार्यकर्ता के घर पर ही खाना खाते थे। प्रचार के दौरान जब कपड़ा गंदा हो जाए तो वह भी कार्यकर्ता के घर ही धुलने जाता था। नशे से हमेशा दूर और शाकाहारी भोजन करने वाले नेताजी प्रतिदिन सुबह दूध पीते थे।
शहर के खैराबाद निवासी समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला महासचिव मोहम्मद अहमद खां ने बताया कि उनके चाचा बरकत अली खां शुरू से मुलायम सिंह यादव से जुड़े थे। वर्ष 1980 में वे कक्षा छह में पढ़ते थे तब नेताजी सुल्तानपुर आने पर डाक बंगले में ठहरते थे। रोज शाम को नेताजी घर पर भोजन करने आते थे। उस समय पूर्व विधायक हरिचरन यादव भी पार्टी से जुड़े थे।
प्रचार के दौरान जब नेताजी का कपड़ा गंदा हो जाता था तो उसे धुलने के लिए हरिचरन यादव के घर जाता था। नेताजी प्रतिदिन सुबह दूध पीते थे। वे घर से डाक बंगले दूध लेकर जाते और नेताजी को पिलाते थे। वर्ष 1989-90 के बीच का दिन था। घर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा पहुंचे थे।
नेताजी ने बेनी प्रसाद वर्मा से मजाकिया लहजे में कहा, बेनी यहां भोजन बना है, खाना नहीं। बेनी प्रसाद वर्मा के मुंह से निकला नेताजी आप जहां जाते हैं, वहां भोजन ही बनता है। इसके बाद लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े। यहां भोजन का मतलब शाकाहार से था। बाद में नेताजी ने बरकत अली को पार्टी से टिकट देकर सदर से विधायक बनाया था।