संजोकर रखी हैं पांच दशक में मंचित नाटकों की यादें
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रही है। इस उपलक्ष्य में आठ दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। समारोह के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है।
इस प्रदर्शनी में पिछले पांच दशकों में मंचित नाटकों में प्रयुक्त सामग्री को दर्शाया गया है। इसमें पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और मंच सज्जा सामग्री शामिल है। अभिनय में प्रयुक्त वस्तुओं का भी व्यापक संग्रह प्रस्तुत किया गया है। निदेशक बिपिन कुमार ने बताया कि यह प्रदर्शनी दर्शकों को आकर्षित कर रही है। रंगमंच पर वेशभूषा और मंच सामग्री का विशेष महत्व होता है। कला निर्देशक इनके माध्यम से पात्रों और कथानक को सजीवता देते हैं। अकादमी ने नाट्य कला को समृद्ध करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजा है।
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण विभिन्न नाटकों के पात्रों की पगड़ियां हैं। इन पगड़ियाें में विभिन्न कालखंडों और राजवंशों की शैलियां दिखती हैं। यह प्रदर्शनी भारतीय संस्कृति और परंपरा में पगड़ी के महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही, कई मुखौटों को भी इस प्रदर्शनी में रखा गया है।
संजोकर रखी हैं पांच दशक में मंचित नाटकों की यादें
संजोकर रखी हैं पांच दशक में मंचित नाटकों की यादें
संजोकर रखी हैं पांच दशक में मंचित नाटकों की यादें