बायें से शहीद गणेश शंकर की पत्नी गुड़िया यादव, उनका बेटा आकृत व भाई सुरेश यादव।
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उरी हमले में शहीद हुए गणेश शंकर के भाई सुरेश यादव ने बताया कि18 सितंबर की बात है जब छोटे भाई गणेश शंकर की शहादत की खबर ग्राम प्रधान ने आकर दी। घर मे हाहाकार मच गया। वो ज़ख्म आज भी ताज़ा है।
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं मेरी हाइट कम थी इसलिए भर्ती के दौरान रिजेक्ट हो गया। छोटे भाई का सेलेक्शन हुआ तो बहुत खुश था। घर में सबसे बड़ा मैं हूँ तो सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। लेकिन एक बात का अफसोस है जब भाई शहीद हुआ तो योगी आदित्यनाथ जी उस वक़्त सांसद थे। हमारे घर भी आये थे। बहुत से वादे किए थे जो आज तक पूरे नही हुए...
वहीं, गणेश की पत्नी गुड़िया कहती हैं कि वह अपने आठ साल के बेटे को फौजी बनाना चाहती हैं। इसलिए उसकी शिक्षा पर बहुत ध्यान देती हैं। स्वयं आकृत भी अपने पिता की तरह फौजी बनकर देश की सेवा करना चाहता है।
शहीद राजेश यादव के भाई बीकेश यादव व मां सुमरिया देवी।
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शहीद राजेश यादव बलिया के रहने वाले थे। उनके भाई बीकेश यादव ने बताया कि हमारे जीजा जी न्यूज देख रहे थे। उसी से पता चला कि भाई शहीद हो गए। हमने घर के सारे फोन बन्द कर दिए कि माँ को इस बात का न पता चले। उसी वक़्त भाभी की डिलीवरी भी होने वाली थी, लेकिन सूचना थाने पहुंच गई। मैं थाने पर गया कि कोई घर आकर सूचना न दे दे। लेकिन तब तक मीडिया वाले घर पहुंच गए और पूरे परिवार को पता चल गया कि भाई देश की सेवा करते-करते शहीद हो गए।
शहीद राजेश कुमार सिंह के पिता राजेन्द्र सिंह
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शहीद राजेश कुमार सिंह के पिता राजेन्द्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि 18 सितंबर को घर पर एकदम से दरोगा, थानेदार के साथ ही कई पुलिसकर्मी आए और जानकारी दी कि मेरा बेटा उरी हमले में शहीद हो गया। वो छोटा था। उसे पढ़ा लिखाकर सेना में भेजा था।
राजेंद्र ने कहा कि मैं चाहता हूं कि परिवार का कोई और बच्चा भी सेना में जाए। राजेश का बेटा और मेरा पोता है। मैं चाहूंगा कि वह जवान बनकर देश की सेवा करे।
राजेंद्र कहते हैं कि मैं अमर उजाला के माध्यम से शासन-प्रशासन से ये बात कहना चाहता हूं कि मेरे बेटे की एक प्रतिमा तो कहीं बनवा दे ताकि उसका नाम जिंदा रहे।