फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहादत से पहले भाई ने कहा, 'छोटू ऊपर जाने का समय आ गया है, अब बात नहीं हो पाएगी'

Mon, 24 Dec 2018 07:46 PM IST
दुष्यंत शर्मा काविश अजीज लेनिन/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
शहीद हरेंद्र यादव के पिता व उनका भाई नागेंद्र यादव। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

अमर उजाला की ओर से सोमवार को लखनऊ के सेंट जोसेफ कॉलेज में आयोजित 'जय हिंद जय हिंद की सेना' कार्यक्रम में उरी हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर जवानों परिजनों ने शहीदों से जुड़ी अपनी यादें साझा की।

विज्ञापन


ऊपर जाने का समय हो गया है
शहीद हरेंद्र यादव के भाई नागेंद्र यादव कहते हैं, '17 सितंबर 2016 को जब भाई से बात हुई तो उन्होंने कहा कि छोटू अब बात नहीं हो पाएगी, अब ऊपर जाने का समय आ गया है। उस दिन मैं न्यूज़ चैनल देखते-देखते सो गया। सुबह पता चला कि आर्मी के उरी सेक्टर में हुए एक हमले में बिहार रेजिमेंट के 17 जवान शहीद हो गए हैं। हमें नही पता था कि भाई भी उसी में होंगे। शाम तक फोन आ गया कि हरेंद्र शहीद हो गए।'

नागेंद्र कहते हैं कि मैं भी सेना में जाना चाहता था। जब भर्ती के लिए गया और दौड़ लगाने को कहा गया तो कुछ डिफ़ॉल्ट निकला और मैं रिजेक्ट हो गया। नागेंद्र सरकार से भी नाराज़ है। वह कहते हैं बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई थीं उस समय लेकिन कुछ नहीं हुआ। कहा गया था कि शहीद की मूर्ति बनेगी। उनके नाम पर रोड बनेगी। घर बनेगा। परिवार में किसी न किसी को नौकरी देने की बात कही गई थी... वो भी नहीं हुआ। सिर्फ दो गेट बने हैं जिनका नामकरण आज तक नहीं किया गया।
विज्ञापन


 

'छोटे भाई की शहादत की खबर आई तो हाहाकार मच गया'

बायें से शहीद गणेश शंकर की पत्नी गुड़िया यादव, उनका बेटा आकृत व भाई सुरेश यादव। - फोटो : amar ujala
उरी हमले में शहीद हुए गणेश शंकर के भाई सुरेश यादव ने बताया कि18 सितंबर की बात है जब छोटे भाई गणेश शंकर की शहादत की खबर ग्राम प्रधान ने आकर दी। घर मे हाहाकार मच गया। वो ज़ख्म आज भी ताज़ा है।

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं मेरी हाइट कम थी इसलिए भर्ती के दौरान रिजेक्ट हो गया। छोटे भाई का सेलेक्शन हुआ तो बहुत खुश था। घर में सबसे बड़ा मैं हूँ तो सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। लेकिन एक बात का अफसोस है जब भाई शहीद हुआ तो योगी आदित्यनाथ जी उस वक़्त सांसद थे। हमारे घर भी आये थे। बहुत से वादे किए थे जो आज तक पूरे नही हुए...

वहीं, गणेश की पत्नी गुड़िया कहती हैं कि वह अपने आठ साल के बेटे को फौजी बनाना चाहती हैं। इसलिए उसकी शिक्षा पर बहुत ध्यान देती हैं। स्वयं आकृत भी अपने पिता की तरह फौजी बनकर देश की सेवा करना चाहता है।

'भाई की शहादत की खबर आई, उसी समय भाभी की डिलीवरी होने वाली थी'

शहीद राजेश यादव के भाई बीकेश यादव व मां सुमरिया देवी। - फोटो : amar ujala
शहीद राजेश यादव बलिया के रहने वाले थे। उनके भाई बीकेश यादव ने बताया कि हमारे जीजा जी न्यूज देख रहे थे। उसी से पता चला कि भाई शहीद हो गए। हमने घर के सारे फोन बन्द कर दिए कि माँ को इस बात का न पता चले। उसी वक़्त भाभी की डिलीवरी भी होने वाली थी, लेकिन सूचना थाने पहुंच गई। मैं थाने पर गया कि कोई घर आकर सूचना न दे दे। लेकिन तब तक मीडिया वाले घर पहुंच गए और पूरे परिवार को पता चल गया कि भाई देश की सेवा करते-करते शहीद हो गए।
विज्ञापन

'बेटे की एक प्रतिमा तो बनवा दें ताकि उसका नाम जिंदा रहे'

शहीद राजेश कुमार सिंह के पिता राजेन्द्र सिंह - फोटो : amar ujala
शहीद राजेश कुमार सिंह के पिता राजेन्द्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि 18 सितंबर को घर पर एकदम से दरोगा, थानेदार के साथ ही कई पुलिसकर्मी आए और जानकारी दी कि मेरा बेटा उरी हमले में शहीद हो गया। वो छोटा था। उसे पढ़ा लिखाकर सेना में भेजा था।

राजेंद्र ने कहा कि मैं चाहता हूं कि परिवार का कोई और बच्चा भी सेना में जाए। राजेश का बेटा और मेरा पोता है। मैं चाहूंगा कि वह जवान बनकर देश की सेवा करे।

राजेंद्र कहते हैं कि मैं अमर उजाला के माध्यम से शासन-प्रशासन से ये बात कहना चाहता हूं कि मेरे बेटे की एक प्रतिमा तो कहीं बनवा दे ताकि उसका नाम जिंदा रहे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें