फोटो-11-गोंडा के कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक करते डीएम। -संवाद
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गोंडा। देश की बड़ी योजनाओं में शामिल सरयू नहर परियोजना का शुभारंभ भले ही दिसंबर में प्रधानमंत्री ने कर दिया था लेकिन इसकी कई नहरें अब भी अधूरी हैं। जिसके चलते बड़ी संख्या में किसानों को इस परियोजना का लाभ अभी भी नहीं मिल पा रहा है।
सरयू नहर परियोजना की शुरुआत 1971-72 में हुई थी। इसके जरिए सिंचाई विभाग ने नौ जिलों के 30 लाख किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया था। जिसमें 14 लाख 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि की सिंचाई की सुविधा देने की बात कही गई थी। 9802 करोड़ की लागत की परियोजना से मुख्य नहर 350 किलोमीटर लंबी है, जबकि सहायक नहरों की लंबाई 6600 किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत पांच नदियों घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा व रोहिणी से जोड़ी गई हैं। परियोजना का शुभारंभ तो दिसंबर में करा दिया गया, लेकिन अभी भी कई नहरें भी अधूरी हैं। इसका खुलासा गुुरुवार को जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक में हुआ। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में नहर अनुरक्षण से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड-चार की ओर से बताया गया कि सरयू नहर परियोजना में कृषकों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए वर्तमान समय में सभी चार खंडों सरयू नहर खंड- एक, दो, तीन, चार में 190 नहर हैं। जिसकी कुल लंबाई 1338.109 किमी है। समीक्षा में यह बात सामने आई कि 190 नहरों में 172 नहरें ही चल रही हैं। 18 नहरें अब भी संचालित नहीं हैं। चालू अप्रैल माह में सरयू नहर खंड-चार की चार नहरों का अधिग्रहण प्रस्ताव बनाकर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को भेजा गया है।