मेरठ-गाजियाबाद-दिल्ली रैपिड रेल परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बड़ी सौगात साबित होगी। परियोजना को तेजी से पूरा कराने के लिए सरकार ने बजट में 1326 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। मेट्रो से तीन गुना तेज गति से चलने वाली रैपिड रेल उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को नई उड़ान देगी।
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार के ज्वाइंट वेंचर में बन रहे इस परियोजना का करीब 68 किमी का हिस्सा यूपी में है। साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किमी का प्राथमिकता खंड 2023 तक और दिल्ली से मेरठ तक पूरा कॉरिडोर 2025 तक शूरू हो जाएगा। परियोजना की लागत 30,274 करोड़ रुपए है। इसमें प्रदेश सरकार 17 प्रतिशत राशि देगी। प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में 1326 करोड़ रुपये आवंटित भी किए हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और रेपिड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नेटवर्क सहित दिल्ली के मास ट्रांजिट सिस्टम की लंबाई 743 किमी होगी। जो लंदन क्रॉस रेल, हांगकांग एमटीआर और पेरिस आरईआर की लंबाई से अधिक है। आरआरटीएस के जीएम वीरेंद्र कुमार ने बताया कि यूपी सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए पिछले साल करीब 650 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसके अलावा सरकारी भूमि पर राज्य सरकार की ओर से कार्य करने की अनुमति दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही यह भूमि सरकार की ओर से हस्तांतरित की जाएगी।
मेरठ-गाजियाबाद-दिल्ली रैपिड रेल परियोजना की लंबाई 82.15 किमी है। मेरठ में आरआरटीएस नेटवर्क पर स्थानीय परिवहन सेवाएं भी मिलेंगी। इसके लिए 21 किमी की दूरी में 13 स्टेशन बनेंगे। कॉरिडोर पर दो डिपो स्टेशनों सहित 24 स्टेशन होंगे। इनमें सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदी नगर साउथ, मोदी नगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रहमपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौरली मेट्रो, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम और मोदीपुरम डिपो शामिल हैं।