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हाल-ए-अस्पतालः मरीजों को नही मिल रही दवाएं

Fri, 05 Sep 2014 03:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पेट की परेशानी का इलाज कराने सिविल अस्पताल आए मलिहाबाद के रम्मा (60) को ओपीडी नंबर 11 में बैठे डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं।
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काउंटर से दवा लेने के बाद दोबारा ओपीडी पहुंचे तो डॉक्टर ने बताया कि लिखी गई एक एंटीबायोटिक दवा तो इसमें है ही नहीं।

दोबारा काउंटर पर पहुंचे तो फॉर्मासिस्ट ने दवा देने से मना कर दिया। इसके बाद 48 रुपये देकर उन्होंने बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी। रम्मा की शिकायत थी कि अस्पताल में आए दिन यही स्थिति रहती है।

राजकुमार (56) का जोड़ों में दर्द का दो महीने से लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऑर्थो ओपीडी में बैठे डॉक्टर ने एक महीने की कैल्सियम की दवा लिखी, लेकिन उन्हें पांच दिन की दवा देकर लौटा दिया गया।
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मजबूरी में उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। अब तक वह करीब 1200 रुपये की कैल्सियम की गोली बाहर से खरीद चुके हैं, लेकिन अस्पताल से पूरी दवा मिलनी मुश्किल हो रही है।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त एंटीबायोटिक और कैल्सियम की गोली नहीं मिल रही है। कंपनियों से मांग के अनुरूप दवा आपूर्ति न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसलिए जो दवाएं स्टॉक में हैं उससे ही काम चलाया जा रहा है। सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में मेडिकल स्टोर पर मरीजों की भीड़ का फायदा उठाकर काउंटर पर आधी अधूरी दवा देकर लौटाया जा रहा है।

अस्पतालों के फॉर्मासिस्टों की मानें तो जिन कंपनियों से दवा आपूर्ति के लिए करार हुए हैं, वहां से मांग के अनुसार दवाओं की आपूर्ति नहीं हो रही है।

इससे जो एंटीबायोटिक और कैल्शियम दवाएं अस्पतालों में हैं, उनका वितरण नियंत्रित कर दिया गया है।

अस्पतालों से मिली जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के दवा भंडार में एंटीबायोटिक दवा के संकट के चलते दवा वितरण काउंटर से इनका वितरण बंद है।

मरीज को एंटीबायोटिक दवा लिखे जाने पर उसे मेन स्टोर से एक दो दिन की दवा देकर चलता कर दिया जा रहा है। वहीं कुछ मरीजों को बिना दवा दिए भी लौटाया जा रहा है।

इतना ही नहीं, दवाओं के संकट के चलते वैकल्पिक दवाओं से भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

इन दवाओं का टोटा
सूत्रों के मुताबिक इन सरकारी अस्पतालों में मुख्य रूप से एमॉक्सीसाइक्लिन, सिप्लॉक्स, टीडीलॉन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, ऑक्सोफ्लॉक्सासिन, डॉक्सीसाईकभनील एजीथ्रोमाइसिन, सिट्रिजिन समेत पेंटाप्रोजोल, कैल्शियम और हृदय रोगियों की कई दवाओं की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो रही है।
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कुछ दवाएं देकर टरका देते हैं
सरकारी अस्पतालों में एंटीबायोटिक और कैल्सियम दवाओं की खपत को नियंत्रित करने लिए मरीजों को कई काउंटरों के चक्कर लगवाए जाते हैं।

इतना ही नहीं, व्यवस्था के तहत डॉक्टर जिस पर्ची पर दवा लिखते हैं, उसे दवा देने के बाद फॉर्मासिस्ट अपने पास रख लेते हैं।

इससे जिन मरीजों को दवा के बारे में जानकारी नहीं होती है, उनको आधी अधूरी दवा देकर लौटा दिया जाता है। जो दवाओं के बारे में जानकारी रखते हैं, वे पूरी दवा न मिलने पर मेन स्टोर पर लाइन लगाकर अन्य दवा ले लेते हैं।

सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके हसन कहते हैं कि अस्पताल में दवा आपूर्ति में कुछ समय पहले गड़बड़ी हुई थी। अभी ऐसी कोई दिक्कत नहीं है।

मरीज को पूरी दवा क्यों नहीं मिली, इसकी कोई शिकायत नहीं मिली है। सभी काउंटर पर एंटीबायोटिक और कैल्शियम की दवाएं मिलें, इसके लिए कहा जाएगा।
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