सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कम वेतन के कारण अच्छे शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा सरकार इन कॉलेजों में संविदा पर काम करने वाले प्रोफेसरों को आकर्षक वेतन देने की तैयारी कर रही है।
वेतन में 15 से 20 हजार रुपये बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। शीघ्र ही यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही बढ़े हुए वेतन पर ही शिक्षक रखे जाएंगे।
सूबे में मौजूदा समय में 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। लेकिन इस साल इसमें चार और मेडिकल संस्थान जुड़ जाएंगे।
नहीं बढ़ेगा लेक्चरर का वेतन
सभी मेडिकल कॉलेज व संस्थानों में शिक्षकों की बेहद कमी है। हाल में सरकार ने आठ मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के अतिरिक्त पद स्वीकृत कर दिए हैं।
लेकिन जब तक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से शिक्षकों की नियमित भर्तियां नहीं होती हैं, तब तक इन कॉलेजों में संविदा के शिक्षकों से ही काम चलाया जाना है।
दूसरी ओर सरकार फिलहाल लेक्चरर के वेतन को नहीं बढ़ाएगी। मौजूदा समय में लेक्चरर को अभी 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके ऊपर के असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के वेतन में 15 से 20 हजार रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार हो गया है।
इस प्रस्ताव पर वित्त सहित अन्य विभागों की अनापत्ति प्राप्त की जा रही है। इसके बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा।
कम वेतन के चलते नहीं मिलते अच्छे शिक्षक
सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कई बार संविदा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रयास किया। लेकिन बहुत अच्छे शिक्षक नहीं मिल सके।
इसका मुख्य कारण प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में संविदा शिक्षकों का कम वेतन है। जबकि निजी मेडिकल कॉलेज सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में अधिक वेतन देकर अपने यहां अच्छे शिक्षकों को तैनात कर लेते हैं।
वहीं शिक्षकों की कमी के कारण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) भी समय-समय पर एमबीबीएस की सीटें घटाने की चेतावनी देती है।
इन्हीं समस्या को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी संविदा शिक्षकों के वेतन बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
किस पद पर कितना वेतन देने का प्रस्ताव
पद--वर्तमान(रु. में)--प्रस्तावित (रु. में)
असिस्टेंट प्रोफेसर--45,000--60,000
एसोसिएट प्रोफेसर--60,000--80,000
प्रोफेसर--70,000--90,000