उन्होंने कहा कि इन हालातों में केंद्र सरकार से मांग है कि वह आरक्षण की सकारात्मक व्यवस्था को संविधान की नौवीं अनुसूची में लाकर इसको तब तक सुरक्षा कवच प्रदान करे जब तक उपेक्षा व तिरस्कार से पीड़ित करोड़ों लोग देश की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो जाते है। जो आरक्षण की सही संवैधानिक मंशा है।