बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर पार्टी अपना खोया जनाधार फिर से बढ़ाने में जुटेगी। इस सिलसिले में 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन ‘जन कल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया गया है।
इस दिन पार्टी के नेता व पदाधिकारी गरीबों की मदद कर आम लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाएंगे। जिला स्तर पर बड़े-बड़े सम्मेलन कर संगठन की ताकत दिखाएंगे। साथ ही बूथ स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाने का काम जारी रहेगा।
1984 में स्थापना के बाद बसपा सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। बसपा संस्थापक कांशीराम के रहते फर्श से अर्श पर पहुंची पार्टी 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद तेजी से लुढ़कने लगी।
विधानसभा चुनाव में सौ की संख्या भी न छू पाई पार्टी का लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया। इसके बाद हरियाणा और महाराष्ट्र में भी पार्टी को निराशा हाथ लगी। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के कगार पर खड़ी बसपा को झारखंड व जम्मू कश्मीर में भी तगड़ा झटका लगा है।
राज्यसभा के बाद सूबे की विधान परिषद में भी पार्टी की ताकत घटने वाली है। अगले महीने 12 सीटों के चुनाव होंगे तो परिषद में अपनी सात सीटों की जगह बसपा सिर्फ दो सीटें ही जीत पाएगी। सत्ता से बाहर होने के साथ ही ताकत में लगातार गिरावट ने पार्टी की चुनौती ज्यादा ही बढ़ा दी है।