सिरसिया ब्लॉक में प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह में शनिवार को कुछ नाबालिग जोड़े भी शादी के बंधन में बंध गए। लोगों ने इसकी जानकारी वहां मौजूद अधिकारियों को दी, लेकिन उन्होंने बाल विवाह को रोकने की जहमत नहीं उठाई। यह तब हो रहा है, जब श्रावस्ती देश में नाबालिगों के विवाह के मामले में पहले स्थान पर है।
बाल विवाह के मामले में श्रावस्ती पूरे देश में पहले स्थान पर है। यहां तक कि कुछ देशों के आंकड़ों में भी श्रावस्ती पहले पायदान पर ही खड़ा है। इसे लेकर यूनिसेफ पूरे जिले में बाल विवाह रोकने के लिए अभियान चला रहा है। नीति आयोग भी इस सामाजिक बुराई को लेकर चिंतित है। इसे रोकने के लिए कई गैर सरकारी संगठनों को नीति आयोग ने यहां प्रशासन की मदद करने के लिए तैनात किया है, लेकिन प्रशासन ही सारे नियमों को दरकिनार करके खुद ही बाल विवाह करा रहा है।
यही नहीं बाल विवाह करने वालों को दंडित करने के बजाए उन्हें सरकारी अनुदान भी दे रहा है। ऐसा ही कुछ शनिवार को सिरसिया में प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह में देखने को मिला। यहां चैलाही निवासी राम पारस अपने पुत्र जय जय राम का विवाह विकास खंड निवासी विश्राम की पुत्री शांती देवी से कराने के लिए आए थे। विवाह मंडप पर जब सात फेरे लिए जा रहे थे, तो स्थानीय लोगों की निगाह इस जोड़े पर पड़ी। यह जोड़ा देखने से ही नाबालिग लग रहा था।
लोगों के मुताबिक लड़की की उम्र ज्यादा से ज्यादा 13 वर्ष व लड़के की उम्र 16 वर्ष रही होगी। ऐसे ही कई और भी जोड़े वहां दिखाई दिए, जिनकी उम्र तय आयु से बहुत ही कम दिखाई दे रही थी। इस बाल विवाह की जानकारी स्थानीय लोगों ने तत्काल वहां मौजूद अधिकारियों को दी, लेकिन अधिकारी बाल विवाह को रोकने के बजाय इसको जल्द से जल्द निपटाने में लग गए। इसके साथ ही उन्हें सामूहिक विवाह में मिलने वाला समस्त सरकारी लाभ भी दे दिया।