इनमें तीन अधिकारियों की वजह से सरकार की सबसे ज्यादा फजीहत हो रही है। एक अधिकारी लंबे समय से एक विभाग में कुंडली जमाए थे। पिछले दिनों हटाए गए, लेकिन कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ। अब उन्हें स्थापित करने के लिए मातहत अफसरों की फौज बढ़ाई जा रही है। विधायकों का दावा है कि सत्र के बाद ऐसे अफसरों का इधर से उधर होना पक्का है।
इसी तरह करीब एक दर्जन जिलों के डीएम व कप्तान के खिलाफ शिकायत है कि वे जनप्रतिनिधियों के सही काम के बारे में भी नहीं सुनते। कोरोना संक्रमण के दौरान वे केवल फोटो खिंचाकर ट्वीट करते रहे, फील्ड में निकले तक नहीं। कई अफसर सत्ताधारी दल के जिलाध्यक्ष और विधायकों से ज्यादा विरोधी दलों से जुड़े लोगों की सुन रहे हैं।
ऐसे अफसरों की विदाई भी पक्की है। तमाम लोगों ने अपने जिले की शिकायतें प्रभारी मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाई है। शुक्रवार को भी एक प्रभारी मंत्री अपने प्रभार वाले जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष व विधायकों के साथ कुछ अफसरों की शिकायत लेकर मुख्यमंत्री से मिले।