यादव सिंह का प्रकरण एसआईटी की जांच के दायरे आने से मायाराज के कई प्रभावशाली नेता व नोएडा प्राधिकरण के चार से अधिक अफसरों की भी जांच होनी तय है।
काले धन पर बनी एसआईटी द्वारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड(सीबीडीटी) से यादव सिंह से संबंधित दस्तावेजों को प्रवर्तन निदेशालय के साथ साझा करे जाने को कहे जाने के बाद से ही यह स्पष्ट हो गया है कि अब इस मामले में किसी तरह की लीपापोती की संभावना किसी हद तक समाप्त हो गई है।
हालांकि, केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मामले की जांच को अपने हाथ में ले लिए जाने के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि यादव सिंह के साथ उसके कारनामों में शामिल या उसकी तरह आंख मूंद कर रखने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।
अधिकारियों को इसमें अपनी भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा, जिसमें उनकी बचत हाल-फिलहाल संभव नहीं प्रतीत हो रही है। जांच एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह के कार्यकाल के दौरान नोएडा विकास प्राधिकरण के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच के निर्देश हैं।