लोकसभा चुनाव के पहले कई नेताओं ने मन मुताबिक काम न करने की शिकायत कर अपने-अपने जिले के कई अफसरों का तबादला करवा दिया था।
सरकार ने उनकी जगह दूसरे अफसरों की तैनाती की तो वे सत्ता का मन समझ कर काम में जुट गए। खुल्लम खुल्ला खेल शुरू हो गया।
दिखाना शुरू कर दिया कि वह क्या करना चाहते हैं? जैसी उम्मीद थी वैसा ही हुआ।
आयोग ने पक्षपात की शिकायतें मिलते ही ऐसे अफसरों को हटा दिया, मगर सबसे मुश्किल उन जिलों में हुई है जहां आयोग ने उन्हीं अधिकारियों को तैनात कर दिया जिन्हें चुनाव से पहले हटवाया गया था।
कई कलक्टर और एसपी इस तरह की तैनाती पा गए हैं। अब काम की जगह ट्रांसफर पोस्टिंग के जरिये सियासी लक्ष्य साधने की फिराक में रहने वाले नेताओं की सांसें ऊपर नीचे हो रहीं हैं।