बिजली कर्मियों की एकजुटता, क्रमिक अनशन के दौरान दिखी आक्रमकता और संघर्ष समिति के संयोजक की हालत बिगड़ने की घटना को देखते हुए सोमवार को पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने वार्ता के लिए बुलाया। बातचीत में प्रबंधन ने निगमों से जुड़े आंकड़ें पेश किए, जिसे संघर्ष समिति ने खारिज कर दिया।
पदाधिकारियों ने मांग की कि कर्मचारियों की छंटनी बंद की जाए, स्थानांतरण रद्द हो और वेतन कटौती वापस की जाए। इस पर प्रबंधन ने शीघ्र ही विस्तृत वार्ता के लिए बुलाने का आश्वासन दिया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से चल रहे क्रमिक अनशन में रविवार को उपभोक्ता परिषद सहित सभी ऊर्जा संगठनों ने उत्पीड़न के मुद्दे पर आरपार की लड़ाई का एलान किया था। दिनभर अनशन चलने के बाद रात 10 बजे संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे की हालत बिगड़ गई। शुगर स्तर गिरने के साथ ही उनका बीपी भी बढ़ गया।
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आरोप है कि रविवार रात 12 बजे से दो बजे तक पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पुलिस और मेडिकल टीम का दबाव बनाकर उनका अनशन समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन रात में ही बड़ी संख्या में बिजली कर्मी एकजुट हो गए।
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आधी रात शक्ति भवन में नारेबाजी चलती रही। सोमवार सुबह भी शैलेंद्र दुबे के नेतृत्व में तमाम बिजली कर्मी शक्ति भवन गेट के अंदर अनशन पर बैठ गए। एलान किया कि जब तक वार्ता नहीं होगी, तब तक अनिश्चितकालीन अनशन चलेगा। यह देख प्रबंधन ने वार्ता के लिए बुलाया। यहां प्रबंधन ने आंकड़े पेश करना शुरू किया। इसे समिति ने खारिज कर दिया। बाद में पॉवर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि जल्द ही समिति को विस्तृत वार्ता के लिए बुलाया जाएगा। समिति ने कहा कि वार्ता से पहले निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकी जाए।
वहीं, क्रमिक अनशन सोमवार को भी जारी रहा। अनशन में यूपी के साथ ही पंजाब के बिजली कर्मी भी शामिल हुए। छह मई को हरियाणा के बिजली कर्मी शामिल होंगे। साथ ही, घोषित कार्यक्रम के तहत बिजली कर्मियों ने सोमवार रात करीब 8:00 से 9:00 बजे तक अपने घरों की बिजली बंद कर निजीकरण का विरोध किया।