बलरामपुर के कठौवा गांव में अपने बूढ़े पिता के साथ आपबीती सुनाता दद्दन।
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लॉकडाउन के कारण पत्नी की अस्पताल में मौत के बाद स्थानीय स्तर पर दाह संस्कार न होने के कारण पति शव लेकर 1137 किमी दूर बलरामपुर जिले के अपने पैतृक गांव कठौवा पहुंचा। पत्नी का अंतिम संस्कार करने के बाद उसे तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ गांव के ही प्राइमरी स्कूल में क्वारंटीन कर दिया गया है।
यह कठिन दौर बलरामपुर जिले के थाना ललिया ग्राम कठौवा निवासी दद्दन को देखना पड़ा है। दद्दन अपनी पत्नी गीता (30) तथा तीन छोटे- छोटे बच्चों को लेकर लुधियाना पंजाब के कैरातीनगर में मजदूरी करता था। गत 26 अप्रैल को वहीं गर्भवती पत्नी गीता की अचानक तबीयत खराब हो गई। दद्दन ने पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया जहां पर उसकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने दद्दन को चार दिन पत्नी का शव इसलिए नहीं दिया क्योंकि उसकी पत्नी की कोरोना जांच होनी थी। जांच के बाद रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आने पर दद्दन को पत्नी का शव सौंप दिया गया।
दद्दन ने पत्नी का वहीं पर दाह संस्कार करना चाहा लेकिन पड़ोसियों ने कोरोना व लॉकडाउन के कारण शव को कंधा देने से मना कर दिया। थक हारकर दद्दन ने अपने परिचितों से 27 हजार रुपये उधार लिए और किराए की गाड़ी से पत्नी का शव लेकर गत एक मई को गांव पहुंचा। यहां पर पत्नी का अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के बाद पुलिस तथा प्रशासन ने दद्दन को परिवार सहित गांव के ही प्राइमरी स्कूल में क्वारंटीन कर दिया है। ऐसा कोरोना संक्रमण को देखते हुए एहतियात के तौर पर किया गया है। पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा ने बताया कि क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर दद्दन को घर जाने के लिए मुक्त कर दिया जाएगा।