कुछ साल पहले रविंद्र अयोध्या गया था जहां उसकी मुलाकात सीमा से हुई। इसके बाद दोनों अक्सर साथ रहने लगे। रविंद्र और सीमा 23 दिसंबर को लखनऊ आए और अमीनाबाद की बुद्धूलाल धर्मशाला में कमरा नंबर 205 लेकर रहने लगे।
31 दिसंबर को रविंद्र कमरे में ताला लगाकर चला गया। सोमवार शाम बंद कमरे से दुर्गंध आने पर धर्मशाला के कर्मचारियों ने छानबीन की। भीतर पलंग पर सीमा का शव पड़ा देख उनके होश उड़ गए। उसकी गर्दन किसी कपड़े से कसी हुई थी।
धर्मशाला के प्रबंधक ने पुलिस को सूचना दी। इंस्पेक्टर ने बताया कि धर्मशाला का रजिस्टर जांचा गया तो पता चला कि रविंद्र और सीमा ने खुद को पति-पत्नी बताते हुए कमरा बुक कराया था। पुलिस ने रविंद्र की तलाश शुरू की तो वह अमीनाबाद इलाके में ही मिल गया।
हत्या के तीन दिन बाद की थी ऑनलाइन गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश
रविंद्र ने बताया कि हत्या के तीन दिन बाद उसने सीमा की गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की थी। दरअसल, उसके और सीमा के बारे में दोनों के परिवारीजनों को जानकारी थी। सीमा के परिवारीजन जानते थे कि वह रविंद्र के साथ गई है। ऐसे में वह सीमा की हत्या में फंसने की बात सोचकर घबरा गया था। यही वजह थी कि उसने चार जनवरी को ऑनलाइन गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की। हालांकि, इस काम में उसे सफलता नहीं मिली।
सीमा की हत्या के बाद रविंद्र अमीनाबाद इलाके में ही इधर से उधर टहलता रहा। उसे भटकते देख धर्मशाला के प्रबंधक व कर्मचारियों ने किराया चुकाकर कमरा खाली करने को कहा। इस पर रविंद्र ने रुपयों के जुगाड़ की बात कहकर टरका दिया। उसने कहा कि फिलहाल वह छेदीलाल धर्मशाला में रुका हुआ है।
उसका सारा सामान कमरे में ही रखा है। जब वह किराये का भुगतान कर देगा तो कमरा खाली कर देगा। उसकी बात पर विश्वास करके धर्मशाला के कर्मचारियों ने कोई छानबीन नहीं की। सीमा का शव मिलने के बाद पुलिस छेदीलाल धर्मशाला पहुंची तो वहां के रिकॉर्ड में रविंद्र नाम का कोई व्यक्ति ठहरा नहीं मिला।