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एक बार घूम तो आइए महमूदाबाद इकबाल मंजिल

Sun, 29 Sep 2013 10:58 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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अगर आप पुराने लखनऊ की शानो शौकत में जीना चाहते हैं और जिंदगी के कुछ पल बड़े ही चैन से गुजारना चाहते हैं तो लखनऊ सिटी स्टेशन के पास मौजूद इकबाल मंजिल में आपकी हसरत पूरी हो सकती है।
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यहां पर खाने पीने के साथ सुकुन से समय गुजारने की पूरी व्यवस्था है। विक्टोरियन एरा के फर्नीचर और पुरानी दीवारों पर लगी पुरानी कलाकृतियों को जब आप देखेंगे तो खुद को पुराने लखनऊ में पाएंगे कुछ ऐसी है इकबाल मंजिल की शाम।

खाने-पीने का अंदाज भी यहां पूरी तरह से अलग है और आप नवाबी अंदाज में तैयार होने वाले जायकों का बड़ी ही आसानी से आनंद ले सकते हैं।

प्रमुखता से आपकों यहां पर कबाब, पराठा, लच्छेदार पराठे की हर किस्म आसानी से मिलेगी जो आपको नवाबी अंदाज से अपना कायल बना लेगी।

कैसी है इकबाल मंजिल
इकबाल मंजिल का निर्माण सर मोहम्मद अली मोहम्मद खान ने 1928 में अपनी बेगम महारानी जाकिया बेगम के लिए करवाया था। इस भवन का निर्माण अवधी स्टाइल में किया गया है।
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इकबाल मंजिल सिटी स्टेशन वजीरगंज के पास स्थित है। कहा जाता है कि जो लखनऊ को दिल से और काफी करीब से जानना चाहता है तो उसे इकबाल मंजिल की तरफ एक बाद रूख जरूर कर लेना चाहिए।

पेंइग गेस्ट के तौर पर गुजारे शाम: इकबाल मंजिल की देखरेख करने वाले मोहम्मद आमिर नकवी खान इसमें बने आवासीय कमरों को पर्यटकों के किराए पर देते हैं।

भवन की दीवारों पर लगी ब्लैकं एंड व्हाइट पुरानी तस्वीरें उसको खूबसूरत लुक देने के साथ दिल को सुकुन देती हैं। इसके अलावा सोफो पर पड़े ‘मंसाद कुशंस भी आपको नवाबी अंदाज का आराम देकर मस्ती में डूबो देंगे। मुगलई

बावरची खाना में बनता है स्वादिष्ट मुगलई पकवान
महारानी जिस मुगलई पकवान को बनाने के लिए इकबाल पैलेस में बने बावरची खाना यानि किचन को इस्तेमाल करती थी।

आज भी इसी बावरची खाना में लजीज और जायकेदार मुगलई व्यंजनों को पर्यटकों के लिए तैयार किया जाता है। एक समय में कम से कम दस और अधिकतम तीस लोगों केरहने की व्यवस्था है जिसकी बुकिंग आप कुछ दिन पहले करा सकते हैं।
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