सपा में विधान परिषद सदस्य उम्मीदवारों का नाम तय होने के बाद गठबंधन में दरार पड़ गई है। महान दल ने गठबंधन से नाता तोड़ लिया है तो सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने नाराजगी जाहिर की है। दोनों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है।
विधान परिषद सदस्य की चार सीटों को लेकर सपा गठबंधन में शामिल दलों ने भी उम्मीद बना रखी थी। विधान परिषद सदस्य उम्मीदवार नहीं बनने पर सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने ट्वीट कर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि भागीदारी देने की बात सिर्फ जुबां तक सीमित रखने से जनता उनको सीमित कर देती है। इसी तरह सुभासपा के प्रवक्ता ने ट्वीट किया कि सपा अध्यक्ष का फैसला निराश करने वाला है। 38 सीट लड़कर आठ सीट जीतने वाले को राज्यसभा। हम 16 सीट लड़कर छह जीते हैं तो हमारी उपेक्षा, ऐसा क्यों?
अखिलेश को हमारी जरूरत नहीं : केशवदेव
महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने सपा से गठबंधन तोड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को हमारी जरूरत नहीं है। यही वजह है कि वह लगातार उपेक्षा कर रहे हैं। उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का सपना लेकर साथ आए थे। टिकट बंटवारे में सहयोगियों की उपेक्षा का नतीजा है कि सरकार नहीं बनी। चुनाव के बाद से कभी भी किसी मुद्दे पर बातचीत नहीं किया। ऐसे में कब तक इंतजार किया जाए। लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करेंगे। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में केशवदेव मौर्य की पत्नी सुमन को फर्रुखाबाद सदर और बेटे चंद्र प्रकाश मौर्य को बदायूं के बिल्सी से टिकट दिया गया था। वह पूर्वांचल की कई सीटों पर भी टिकट मांग रहे थे।
दलितों की अनदेखी का आरोप लगा दिया इस्तीफा
संत शिरोमणि रविदास महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सपा के वरिष्ठ नेता हृदयराम ने बुधवार को सपा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे में आरोप लगाया कि राज्यसभा व विधान परिषद सदस्यों के चयन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की उपेक्षा की गई है। 22 फीसदी आबादी और विधानसभा चुनाव में भरपूर सहयोग के बावजूद किसी भी दलित को विधान परिषद में नहीं भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को अपनाने की बात करती है लेकिन पार्टी में लगातार दलितों की उपेक्षा हो रही है।