मदरसा बोर्ड नोटिस जारी होते ही मानक विहीन मदरसों में हड़कंप मच गया। वहीं मदरसा माफिया नोटिस को दबवाने के लिए सक्रिय हो गए। इन सात मदरसों में दो मदरसे तो अकेले प्रयागराज से थे जिसकी नोटिस वहां के तत्कालीन उपनिदेशक के माध्यम से तामील कराई गई थी।
मानक विहीन मदरसों की जांच में शासन ने सात को चिह्नित किया था। इनकी मान्यता रद करने व अनुदान वापस लेने का आदेश मार्च 2022 में जारी किया। करीब डेढ़ साल बाद भी मदरसा बोर्ड कार्रवाई करने में हिचक रहा है। हाल की हुई मदरसा बोर्ड की बैठक में संतकबीर नगर के दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजुल इस्लाम नामक केवल एक मदरसे की मान्यता ही निलंबित करा सका है। बाकी छह मदरसे अभी भी सरकार से अनुदान पा रहे हैं और सरकारी खजाने को करोड़ का चूना लगा रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो प्रयागराज मंडल के उपनिदेशक और मदरसा बोर्ड के पूर्व रजिस्ट्रार रहे जगमोहन सिंह की तैनाती मदरसा माफियाओं के एक सक्रिय गिरोह ने मिलकर कराई थी ताकि उनके कुर्सी पर बैठने के बाद अपने बचने के उपक्रम किए जा सकें। यह अनायास नहीं है कि जिन मदरसों का अनुदान समाप्त किया जाना था उनको लाभ पहुंचाने की मंशा से तत्कालीन रजिस्ट्रार और बोर्ड के पदाधिकारियों की ओर से आंखें मूंद ली गईं। 2017 में प्रदेश के ऐसे सभी अनुदानित मदरसे जो सरकारी फंड पा रहे थे, शासन द्वारा उनके मानक को जांचने के निर्देश सभी जिलों में जिलाधिकारियों को भेजे गए। लगभग सात-आठ महीने में जिलों से रिपोर्ट आई।
जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि पूरे प्रदेश में लगभग पैंतीस मदरसे ऐसे हैं जो या तो ग्राम पंचायत की सरकारी जमीनों को कब्जा करके बनाए गए हैं या वे मदरसा नियमावली में दिए गए मानक को पूरा ही नहीं करते हैं। शासन द्वारा इन सभी मदरसों को मानक पूरा करने के लिए उन्हें तीन बार का समय भी दिया गया। कुछ समय बीतने के बाद लगभग पच्चीस मदरसों ने मानक पूरा होने का लिखित शपथपत्र दिया। सरकार ने इन शपथ पत्रों के आधार पर संबंधित मंडलों के मंडलायुक्तगण से दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया। वर्ष 2021 में सभी मंडलायुक्तों की ओर से जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। जिसमें सात मदरसे मानकविहीन पाए गए । जिसमें से कुछ सरकारी जमीनों पर कई साल से अवैध कब्जा करके चला रहे थे। इन मंडलों के मंडलयुक्तों ने प्रदेश के कुल सात मदरसों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति की। मंडलायुक्तों की आख्या के आधार पर शासन ने 25 मार्च, 2022 को इन सभी सात अनुदानित मदरसों की मान्यता समाप्त करने का विधिवत लिखित आदेश जारी कर दिया। इस आदेश का अनुपालन कराने के लिए तत्कालीन रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड ने सभी सातों मदरसों को नोटिस जारी की।
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आदेश को दबाने में जुटे मदरसा माफिया, बैठाया अपना अधिकारी
मदरसा बोर्ड नोटिस जारी होते ही मानक विहीन मदरसों में हड़कंप मच गया। वहीं मदरसा माफिया नोटिस को दबवाने के लिए सक्रिय हो गए। इन सात मदरसों में दो मदरसे तो अकेले प्रयागराज से थे जिसकी नोटिस वहां के तत्कालीन उपनिदेशक के माध्यम से तामील कराई गई थी। सूत्रों की मानें तो इन मदरसों ने मिलकर प्रयागराज में एक मदरसे के प्रबंधक के यहां एक आपात बैठक की। बैठक में उपनिदेशक प्रयागराज मंडल भी सम्मिलित हुए। इन मदरसा प्रबंधकों ने सबसे पहले उपनिदेशक प्रयागराज के साथ अपनी सेटिंग की और आपस में भारी चंदा इकट्ठा करके शासन में बैठे एक विशेष सचिव और एक समीक्षा अधिकारी की मदद से उन्हें मदरसा बोर्ड अपने करीबी अधिकारी को उच्च पद पर बैठा दिया। ताकि मामले को दबा दिया जाए। सूत्रों की माने तो इस मामले में एक आईएएस अधिकारी ने भी महती भूमिका निभाई।
तत्कालीन रजिस्ट्रार पर गंभीर आरोप, शासन से शिकायत
मान्यता रद करने व अनुदान वापस लेने के मामले में तत्कालीन रजिस्स्ट्रार पर गंभीर आरोप लगा। उनके खिलाफ शासन से भी शिकायत की। आरोप है कि 12 मई, 2022 के बाद होने वाली मदरसा बोर्ड की पहली मीटिंग में ही मामला संज्ञान में आने और बतौर उपनिदेशक प्रयागराज रह कर स्वयं दो मदरसों की मान्यता समाप्ति का नोटिस तामील कराने वाले अफसर ने ही बतौर रजिस्ट्रार पूरे एक साल के कार्यकाल में मई, 2022 से लेकर माह जून, 2023 तक मामले को कैसे और क्यों दबाए रखा। गंभीर प्रकरण में मदरसा बोर्ड के तत्कालीन रजिस्ट्रार ने पूरे कार्यकाल में मदरसा नियमावली के अनुसार मान्यता रद करने के लिए न तो सुनवाई की और न ही कोई ठोस पहल की। सूत्रों की मानें तो उनके द्वारा जान-बूझकर इस मामले को दबाये रखा।