गोसाईगंज में पुलिस के साथ मिलकर डकैती डालने के मामले में अधिवक्ता मधुकर मिश्रा को गिरफ्तार करने के लिए लखनऊ पुलिस तलाश करती रहीं। लेकिन मिश्रा उसके हाथ न आया, बल्कि उसने अपने पर चल रहे मारपीट और बलवा के साल 2015 के केस में लखनऊ की जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जज ने उसे 16 मार्च तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है और अगली सुनवाई 16 मार्च को रखी गई है।
इससे पहले मिश्रा ने स्पेशल सीजेएम हिमांशु दयाल श्रीवास्तव के समक्ष आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी। इसमें बताया था कि उस पर 2015 में गाजीपुर थाने में केस दर्ज हुआ था। उस पर घर में घुसकर मारपीट और बलवा करने के आरोप थे। वह इस मामले में जज के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहता है। इस पर कोर्ट ने अभियोजन अधिकारी से मामले के विषय में पूछा, जिन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में मिश्रा के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत कर दी है।
इसके बाद करीब एक बजे मधुकर मिश्रा ने जज के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसने मामले में जमानत के लिए अर्जी नहीं दी और जज ने उसे 16 तारीख तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। 16 मार्च को अगली सुनवाई रखी गई है, जिसमें उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश जेल अधिकारियों को दिए गए हैं।