लखनऊ के शेरपुरलवल गांव में 13 वर्षों से चकबंदी का विवाद चल रहा है। सोमवार को चकबंदी विभाग के अधिकारियों को लवल गांव आना था। जब इसकी भनक किसानों को लगी, तो सैकड़ों की संख्या में किसान व महिलाएं सड़क पर चकबंदी के विरोध में नारेबाजी करने लगीं। विरोध प्रदर्शन की सूचना पर थाने में मौजूद चकबंदी अधिकारी बैरंग वापस लौट गए। तब किसान शांत हुए।
शेरपुरलवल गांव में अधिकतर किसान चाहते हैं कि गांव में चकबंदी न हो। इसी सिलसिले में सोमवार को चकबंदी विभाग के अधिकारियों को लवल गांव आना था,जब इसकी भनक किसानों को लगी, तो विरोध में उतर आए।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रघुराज व गांव के शैलेन्द्र वर्मा, प्रदीप बाजपेई, मनीष, पंकज बाजपेयी, दिलीप मौर्य सहित अन्य किसानों ने बताया कि गांव में कुछ प्रॉपर्टी डीलरों को छोड़कर गांव का कोई भी किसान चकबंदी नहीं चाहता है, पूर्व में कई बार चकबंदी को लेकर गांव में चुनाव भी कराया गया, उसमें भी 95 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी नहीं होने के पक्ष में ही मतदान किया और 5 प्रतिशत किसान ही चकबन्दी चाहते है।
चकबंदी लेखपाल को बनाया जा चुका बंधक
25 नंवम्बर 2018 में भी हस्ताक्षर अभियान चला था,जिसमें 240 किसानों ने चकबंदी होने से साफ मना कर दिया था,जबकि 103 किसान चकबंदी कराने के पक्ष में हस्ताक्षर किये थे। इसके बाद दोबारा बीते तीन वर्ष पूर्व गांव के एक पक्ष से 383 लोगों ने हस्ताक्षर कर चकबंदी न कराए जाने के लिए डीएम से लेकर आलाधिकारियों से गुहार कर चुके हैं।
22 मार्च 2019 को चकबंदी कर्मचारी अकबर अली लगभग तीन दर्जन किसानों की चकबंदी की नोटिस लेकर गांव पहुंचे थे,जहां लगभग 4 दर्जन किसान इकट्ठा हो गए। नोटिस लेने से इनकार कर कर्मचारी को बंधक बनाते हुए जमकर नारेबाजी की थी।