लखनऊ विश्वविद्यालय अपने परीक्षा परिणामों से लेकर स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट तक की समीक्षा कराएगा। इसके लिए विवि में एक माह के अंदर ही एकेडमिक ऑडिट की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय अपनी कमियों को चिह्नित कर उन्हें दूर करेगा, जिससे कि पढ़ाई, परीक्षा परिणाम और शोध की गुणवत्ता बेहतर हो सके। प्रत्येक माह की पांच तारीख को इसकी स्थिति से राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अवगत कराया जाएगा।
उप्र विकास एजेंडा वर्ष 2016-17 के अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों को मूल्यांकन एवं अनुश्रवण कर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी कार्रवाई करने की बात कही गई थी। इसी के अंतर्गत एलयू भी अपना एकेडमिक ऑडिट कराने जा रहा है।
कुलपति प्रो. एसबी निमसे का सेवा विस्तार नवंबर में समाप्त हो रहा है। प्रो. निमसे ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि जाने से पहले एकेडमिक ऑडिट को पूरा करा लें।
वर्तमान स्थिति देख बनेंगी भावी योजनाएं
विवि कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने बताया कि एकेडमिक ऑडिट में कई चीजों को देखा जाएगा। जैसे स्टूडेंट-टीचर रेशियो, विभिन्न कोर्सेज का करिकुलम, परीक्षा परिणाम, छात्रों की उपस्थिति, रिसर्च आउटपुट, विभिन्न विभागों में स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट आदि।
इन सभी का ऑडिट करने से विवि के सामने एक साफ तस्वीर होगी कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिए किन चीजों में कितना सुधार करने की जरूरत है। कहां किस तरह की दिक्कतें चल रही हैं उनकी असल स्थिति सामने होगी जिसके आधार पर भावी योजनाएं बनेंगी।
इन बिंदुओं पर खराब है एलयू का प्रदर्शन
दरअसल, वर्तमान में एलयू में स्टूडेंट्स की उपस्थिति रखने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं। कुछ ही विभाग स्टूडेंट्स की पेपर पर उपस्थिति दर्ज करके रिकॉर्ड तैयार करते हैं।
ऑडिट में असलियत पता चलेगी कि किस विभाग में कितनी बेहतर तरीके से उपस्थिति का रिकॉर्ड रखा गया और छात्र उपस्थिति का प्रतिशत क्या है। वहीं, इस ऑडिट में एक चुनौती प्लेसमेंट भी होगा। साथ ही एलयू संबद्घ कॉलेजों में बहुत से कोर्सेज का परीक्षा परिणाम काफी खराब रहता है।