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विवि दीक्षांत समारोह में 336 छात्रों को मिली पीएचडी डिग्री और गोल्ड

Sun, 21 Aug 2016 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शनिवार को आयोजित किए 23वें दीक्षांत समारोह में 336 छात्र छात्राओं को पीएचडी उपाधि और अपने अपने कोर्स में टॉप करने वालों को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर 147 गोल्ड मेडल विजेताओं को मेडल और डिग्री देकर सम्मानित किया।
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न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर को एलएएलडी (डाक्टरेट ऑफ ला) की मानद उपाधि दी गई।  336 में से 172 पीएचडी डिग्री और गोल्ड मेडल पाने वाली छात्राएं ही थीं। इस पर मुख्यातिथि न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर सहित मुख्यमंत्री ने छात्राओं की खूब सराहना की और इसी तरह

से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं प्रदेश के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने विभिन्न संकायों में पीएचडी पूरी करने वाले छात्रों को उपाधि देकर अलंकृत किया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि शरीक हुए।
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प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंसूर अहमद मीर और  पूर्व मुख्य न्यायाधीश मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर न्यायमूर्ति भवानी सिंह को विधि संकाय में पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान की गई।  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने सभी अतिथियों को स्वागत किया।

प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश सम्मानित

उन्होंने सभी मेडल विजेताओं को डिग्री पूरी कर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में देश हित और समाज हित में कार्य करने और अच्छे इंसान बनने के लिए प्रोत्साहित किया। समारोह में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, सूचना एवं जन संपर्क व उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

दीक्षांत समारोह का शुभारंभ कुलसचिव डा. पंकज ललित की अगुवाई में शुरू हुए ऐकेडमिक प्रोसेशन से हुआ। दीक्षांत समारोह में सीजेआई को विश्वविद्यालय के स्मृति चिन्ह और कुलगीत आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। इनके साथ ही प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इनमें न्यायमूर्ति संजय करोल, न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी, न्यायमूर्ति तरलोक चौहान, यायमूर्ति पीएस राणा, न्यायमूर्ति सुरेशवर ठाकुर, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बरोवालिया।

समारोह में महाधिवक्ता हिमाचल प्रदेश श्रवण डोगरा, प्रदेश राज्य प्रशासनिक न्यायाधीकरण अध्यक्ष न्यायमूर्ति वीके शर्मा, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष केएस तोमर, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह सहित सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारी मौजूद रहे।

आजीविका अर्जित करते तक सीमित न रहे शिक्षा: राज्यपाल

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य एक अच्छे इंसान का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने डिग्री धारकों व पदक विजेताओं को समर्पण की भावना से समाज सेवा के लिए कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में अतिथि को देव का स्थान दिया गया है और पूरे विश्व के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने यहां आए तथा हमारे संतों द्वारा दिखाए गए उच्च मूल्य ग्रहण किए।

यह चिंता का विषय है कि वर्तमान में शिक्षा का मूल उद्देश्य बदल गया है और शिक्षा आजीविका अर्जित करने तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से हमने हर चीज प्राप्त की है लेकिन मानवीय गुण नहीं। राज्यपाल ने कहा कि हमारे समाज में लड़कियों को उचित सम्मान मिले, इसके लिए लोगों की सोच में बदलने लाने की आवश्यकता है।

उन्होंने लड़कियों द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में लड़कों की अपेक्षा अधिक डिग्री प्राप्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी बेटियों ने हमेशा राष्ट्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने रियो ओलंपिक का उदाहरण देते हुए कहा कि दो भारतीय महिला खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं। उन्होंने शिक्षित समुदाय से समाज में फैली सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेने का आग्रह किया।
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अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहें युवा: मुख्यमंत्री

विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आज दीक्षांत समारोह में भी लड़कियों ने लड़कों की अपेक्षा अधिक पदक व डिग्रियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का नियमित रूप से आयोजन करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि ये डिग्री धारक और गोल्ड मेडल विजेता किसी भी अलग अलग क्षेत्र में आगे बढ़ें इसके लिए वे दिल से उन्हें शुभकामनाएं देते है। वे आकाश को छूएं, मगर युवाओं को हमेशा अपनी जमीन, अपनी संस्कृति और समृद्ध परंपराओं से जुडे़ रहना चाहिए, इसी से हमारी असल पहचान होती है।

सफलता के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति अपने ज्ञान व क्षमता का सही उपयोग करे। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य क्षेत्रों में अलग राज्य बनने से लेकर आज तक हुए विकास के बारे जानाकारी दी। हिमाचल आज देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए विकास का आदर्श बनकर उभरा है।

अपने गठन के बाद प्रदेश ने हर क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति की है। वीरभद्र सिंह ने छात्रों से कि वे अपने भविष्य के लिए कठिन परिश्रम करें और जीवन में अनुशासन अपनाएं। उन्होंने देश के प्रति प्यार करने, गरीब व जरूरतमंदों के प्रति उदारता अपनाने  और अच्छा नागरिक बनने का आवाहन किया।

तर्क और वैज्ञानिक तरीके से सोचें शिक्षित लोग: मीर
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंसूर अहमद मीर ने कहा कि अध्ययन संसाधनों का इस प्रकार उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे सभी की ज्ञानवृद्धि व सशक्तिकरण सुनिश्चित हो तथा सभी को समान रूप से ज्ञान स्त्रोत बढ़ाकर अपनी बात रखने का अवसर प्रदान हो। उन्होंने कहा कि शिक्षित लोगों को तर्क व वैज्ञानिक तरीके से सोचना चाहिए और शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा नागरिक बनाना होना चाहिए।
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