हादसे में जान गंवाने वाली एक महिला के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को मय ब्याज के बीमा की धनराशि देने का आदेश दिया है। साथ ही मृतका के पति व पुत्रों को चार वर्ष तक चले मामले में प्रति सप्ताह एक हजार रुपये पेनाल्टी व 15 हजार हर्जाना भी देना होगा।
जिला रायबरेली के गांव सलीमपुर सीकी राही निवासी अखिलेश कुमार और उनके नाबालिग पुत्रों अभिषेक कुमार व आंचल यादव की ओर से 26 अक्तूबर 2021 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय में हजरतगंज स्थित दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और जिलाधिकारी रायबरेली को विपक्षी बनाकर वाद दर्ज कराया गया था।
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इसमें अखिलेश कुमार ने बताया कि 20 अप्रैल 2019 को थ्रेशर में दुर्घटनावश फंसने से आई चोटों के कारण उनकी पत्नी विनीता की मौत हो गई थी। मृतका प्रदेश सरकार की सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना में बीमित थी। बीमित धनराशि पांच लाख का क्लेम करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। वाद का निस्तारण करते हुए गत तीन दिसंबर को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी और सदस्य प्रतिभा सिंह ने निर्णय सुनाया।
दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेशित किया कि वह निर्णय की तिथि से 30 दिन के भीतर परिवादी नंबर एक पति अखिलेश कुमार को बीमित धनराशि पांच लाख का आधा भुगतान करे। वहीं, परिवादी संख्या 2 व 3 के नाबालिग होने के कारण उनके हिस्से की धनराशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते में उनके वयस्क होने तक जमा कराई जाए।
26 अक्तूबर 2021 से प्रति सप्ताह एक हजार रुपये पेनाल्टी का भी भुगतान करे। इसके अतिरिक्त मृतका के पति को वाद व्यय के लिए पांच हजार रुपये और मानसिक कष्ट के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त अदा करे।